हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के पालन में कार्रवाई, फतेहपुर डोबरा और महुआ खेड़ा में हटाए गए निर्माण
भोपाल। राजधानी भोपाल में जलस्रोतों के संरक्षण और अवैध निर्माणों के खिलाफ जिला प्रशासन एवं नगर निगम ने सोमवार को संयुक्त कार्रवाई की। प्रशासनिक अमले ने केरवा डैम के कैचमेंट क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें हटाया।
यह कार्रवाई हाईकोर्ट और (एनजीटी) के निर्देशों के तहत की गई। प्रशासन ने हुजूर क्षेत्र के फतेहपुर डोबरा और महुआ खेड़ा गांव में चिह्नित अवैध निर्माणों को हटाया।
एफटीएल सीमा के 33 मीटर दायरे में हटाए निर्माण
एसडीएम हुजूर के नेतृत्व में तहसीलदार की मौजूदगी में कार्रवाई की गई।
प्रशासन के अनुसार, फतेहपुर डोबरा गांव में करीब 0.405 हेक्टेयर भूमि पर केरवा डैम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 33 मीटर के दायरे में किए गए अवैध निर्माणों को हटाया गया। यह भूमि अर्सलान ताहिर उर्फ अब्दुल ताहिर के नाम दर्ज बताई गई है।
इसके अलावा महुआ खेड़ा गांव में करीब 2.016 हेक्टेयर भूमि पर बने अवैध निर्माणों को भी हटाने की कार्रवाई की गई। यह भूमि मीत पाटीदार पुत्र अजय पाटीदार और खुशीलाल पाटीदार पुत्र मूलचंद पाटीदार के नाम दर्ज बताई गई है।
प्रशासन ने बताया कि हुजूर क्षेत्र में विकसित हो रहे अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी। मंगलवार को भी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित है।
सुनहरी बाग में कार्रवाई का विरोध, रोकी गई कार्रवाई
इधर, जवाहर चौक स्थित सुनहरी बाग क्षेत्र में मकानों को हटाने पहुंची नगर निगम और प्रशासन की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान कुछ मकानों को हटाया जा चुका था।
सूचना मिलने पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बारिश शुरू होने और स्टैंडिंग ऑर्डर का हवाला देते हुए कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से चर्चा की।
इसके बाद प्रशासनिक अमले ने कार्रवाई रोक दी। बताया गया कि 10 में से 5 मकानों को हटाया जा चुका था।
विरोध के दौरान कांग्रेस झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष रोहित राजपूत, कांग्रेस वार्ड-24 अध्यक्ष शोएब खान, कांग्रेस नेता दिलीप मस्के सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
जलस्रोतों के आसपास अवैध निर्माण पर प्रशासन की नजर
केरवा डैम और उसके कैचमेंट क्षेत्र को भोपाल के महत्वपूर्ण जलस्रोतों में शामिल किया जाता है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर जलस्रोतों के आसपास अवैध निर्माणों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाती रही है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और जल संरचनाओं की सुरक्षा के लिए ऐसे निर्माणों पर कार्रवाई जारी रहेगी।