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आंगनवाड़ी केंद्र के औचक निरीक्षण में कार्यों की सराहना, कुपोषित बच्चों और पल्स पोलियो अभियान पर विशेष जोर

संभागीय संयुक्त संचालक एच.के. शर्मा ने बाणगंगा परियोजना के केंद्र क्रमांक 1061 का किया निरीक्षण

भोपाल। महिला एवं बाल विकास विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक ने सोमवार को भोपाल की बाणगंगा परियोजना अंतर्गत सेक्टर अंबेडकर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-1061, शबरी नगर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र में संचालित गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता से किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

निरीक्षण के दौरान संयुक्त संचालक ने द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र में किए जा रहे सहयोगात्मक कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही द्वारा पिछले आठ महीनों से नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे गोद भराई कार्यक्रम को भी सराहनीय बताया।

गोद भराई कार्यक्रम में महिलाओं को दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान हर हेल्थ संस्था की ओर से डॉ. शिवानी के मार्गदर्शन में गोद भराई कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 20 गर्भवती महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक ने गर्भावस्था के दौरान योग के महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने महिलाओं को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और प्रसव पूर्व स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।

पल्स पोलियो अभियान में शत-प्रतिशत कवरेज के निर्देश

संयुक्त संचालक ने निरीक्षण के दौरान पल्स पोलियो अभियान की समीक्षा भी की। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और पर्यवेक्षक विशेष सतर्कता बरतें तथा घर-घर संपर्क कर पात्र बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करें।

कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी पर जोर

उन्होंने निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी केंद्रों में चिन्हित सभी कुपोषित बच्चों के घरों पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता संयुक्त रूप से भ्रमण करें। बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी की जाए तथा प्रत्येक सप्ताह फॉलो-अप रिपोर्ट दर्ज की जाए।

संयुक्त संचालक ने कहा कि इस प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित सुपरवाइजर द्वारा अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए, ताकि कुपोषण मुक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

निरीक्षण के दौरान पर्यवेक्षकों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बेहतर कार्य निष्पादन के लिए निरंतर मार्गदर्शन देने के निर्देश भी दिए गए।

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