नीलम सक्सेना चंद्रा का नया काव्य-संग्रह ‘सीली शामें’ हुआ प्रकाशित, संवेदनाओं और स्मृतियों की अनूठी यात्रा

प्रेम, विरह, प्रकृति और आत्ममंथन की भावनाओं से सजी कविताएँ पाठकों को भीतर तक छूती हैं
भोपाल। हिंदी साहित्य की चर्चित कवयित्री, कथाकार एवं द्विभाषी लेखिका नीलम सक्सेना चंद्रा का नया काव्य-संग्रह “सीली शामें” प्रकाशित हो गया है। यह संग्रह जीवन के सूक्ष्म भावों, स्मृतियों, प्रेम, विरह, प्रकृति और आत्ममंथन को संवेदनशील शब्दों में अभिव्यक्त करता है। पुस्तक पाठकों को अपने भीतर झांकने और जीवन के अनकहे अनुभवों को महसूस करने का अवसर देती है।
संग्रह की कविताएँ उस भावभूमि से जन्मी हैं, जब लेखिका कोलकाता में नए परिवेश और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से गुजर रही थीं। शुरुआती कविताओं में अकेलेपन और उदासी का स्वर है, जबकि आगे चलकर कोलकाता की संस्कृति, वर्षा और आत्मीय वातावरण से उपजी आशा और सकारात्मकता भी स्पष्ट दिखाई देती है। इस दृष्टि से “सीली शामें” निराशा से आशा तक की एक भावनात्मक यात्रा भी है।
लेखिका ने यह कृति अपनी दिवंगत माता श्रीमती शशि सक्सेना की स्मृति को समर्पित की है। उनका मानना है कि जीवन की दृढ़ता और संघर्ष से जूझने की प्रेरणा उन्हें अपनी माता से ही मिली।
नीलम सक्सेना चंद्रा समकालीन हिंदी और अंग्रेज़ी साहित्य की प्रतिष्ठित हस्ती हैं। उनके खाते में सात उपन्यास, नौ कहानी संग्रह, 51 कविता संग्रह, एक यंग एडल्ट फिक्शन तथा 16 बाल साहित्य की पुस्तकें शामिल हैं। उन्हें फोर्ब्स इंडिया की वर्ष 2014 की लोकप्रिय लेखकों की सूची में स्थान मिल चुका है तथा उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। वे प्रेमचंद पुरस्कार, सोहनलाल द्विवेदी पुरस्कार, रवीन्द्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल पोएट्री अवॉर्ड, फ्रीडम अवॉर्ड, सेतु इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस (2024) और रियूल इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं।
अपनी सहज भाषा, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और आत्मीय संवेदनाओं के कारण “सीली शामें” समकालीन हिंदी कविता की उल्लेखनीय कृति मानी जा रही है। यह संग्रह उन पाठकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है जो कविता में जीवन, स्मृतियों और मानवीय रिश्तों की गहराई को महसूस करना चाहते हैं।





