Opinion

जल है तो कल है: आज बचाएं जल, तभी सुरक्षित रहेगा भविष्य

लेखक: शैलेश सिंह कुशवाह, वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता, ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

जल जीवन का आधार है। इसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना असंभव है। मनुष्य, पशु-पक्षी, वनस्पति और समूचा पर्यावरण जल पर निर्भर है। हमारी रोजमर्रा की हर गतिविधि—पीने, खेती, उद्योग, स्वच्छता और विकास—सबकी नींव जल है। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है कि “जल है तो कल है।”

पृथ्वी का अधिकांश भाग जल से घिरा है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा समुद्री खारे पानी के रूप में है, जो न तो पीने योग्य है और न ही कृषि के लिए उपयोगी। मानव जीवन के लिए मीठे और स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है, जो वर्षा, नदियों, तालाबों, झीलों और भूजल से प्राप्त होता है। यदि इन स्रोतों का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट और भी गंभीर हो जाएगा।

आज तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अनियंत्रित भूजल दोहन, नदियों और तालाबों पर अतिक्रमण तथा पर्यावरणीय असंतुलन के कारण जल स्रोत लगातार समाप्त हो रहे हैं। मनुष्य पहाड़ों को काट सकता है, जंगलों को उजाड़ सकता है और प्राकृतिक जल स्रोतों को नष्ट कर सकता है, लेकिन उन्हें उसी रूप में दोबारा नहीं बना सकता। प्रकृति द्वारा दिए गए संसाधनों की भरपाई संभव नहीं है।

जल संकट केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। जंगलों में रहने वाले वन्यजीव भी पानी की तलाश में भटकते हैं। इसलिए जल संरक्षण केवल मानव हित नहीं, बल्कि संपूर्ण जीव-जगत और पर्यावरण के संरक्षण का भी विषय है।

समय की मांग है कि वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाए, तालाबों और नदियों का संरक्षण किया जाए, भूजल का विवेकपूर्ण उपयोग हो तथा प्रत्येक नागरिक जल बचाने की आदत अपनाए। यदि आज हम जल संरक्षण के प्रति जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।

आइए, हम सभी संकल्प लें कि जल की हर बूंद का सम्मान करेंगे, प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा करेंगे और पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

याद रखें—आज बचाएंगे जल, तभी सुरक्षित रहेगा हमारा कल।

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