State

डायनासोरों के अंत से पृथ्वी की सुरक्षा तक… क्षुद्रग्रहों की दुनिया से रूबरू हुए विद्यार्थी, विज्ञान केंद्र में हुआ विशेष आयोजन

भोपाल में अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस पर वैज्ञानिक गतिविधियां, विद्यार्थियों ने सीखा कैसे खोजे जाते हैं अंतरिक्षीय पिंड

भोपाल, 30 जून।
करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी से डायनासोरों के विलुप्त होने से लेकर भविष्य में पृथ्वी को संभावित क्षुद्रग्रह टक्करों से बचाने तक की वैज्ञानिक यात्रा को समझाने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल में अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस 2026 के अवसर पर विभिन्न विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अंतरिक्ष विज्ञान, क्षुद्रग्रहों और ग्रह सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

आयोजन का मुख्य आकर्षण “अंतरिक्षीय पिंड एवं मानव अस्तित्व (Space Rocks & Survival): डायनासोर के विलुप्त होने से ग्रह सुरक्षा तक (From Dinosaur Extinction to Planetary Protection)” विषय पर आधारित विशेष प्रदर्शनी रही। इसमें क्षुद्रग्रहों की उत्पत्ति, उनकी संरचना, पृथ्वी से टकराने की घटनाएं, डायनासोरों के विलुप्त होने में क्षुद्रग्रह प्रभाव की संभावित भूमिका और भविष्य में पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयासों को प्रदर्शों और जानकारीपूर्ण सामग्री के माध्यम से समझाया गया।

विद्यार्थियों ने किया वास्तविक क्षुद्रग्रह खोज का अनुभव

कार्यक्रम के दौरान विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए “प्रत्यक्ष क्षुद्रग्रह खोज (Hands-on Asteroid Hunting)” गतिविधि आयोजित की गई। इसमें छात्रों को कंप्यूटर आधारित वास्तविक खगोलीय चित्रों का विश्लेषण कर क्षुद्रग्रहों की पहचान करने की प्रक्रिया बताई गई। विद्यार्थियों ने जाना कि वैज्ञानिक किस तरह अंतरिक्ष में मौजूद छोटे-बड़े पिंडों का अध्ययन करते हैं और नई खोजों के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हैं।

वहीं कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए “अपना शानदार क्षुद्रग्रह बनाइए” गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने रचनात्मकता के साथ विभिन्न आकार और स्वरूप वाले क्षुद्रग्रह मॉडल तैयार किए। इस माध्यम से उन्हें क्षुद्रग्रहों की अनियमित आकृति, सतह और संरचना के वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी गई।

क्रेटर प्रभाव से समझाया टक्कर का विज्ञान

कार्यक्रम में आयोजित “क्रेटर प्रभाव प्रदर्शन (Crater Impact Demonstration)” भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि जब कोई क्षुद्रग्रह या उल्कापिंड तेज गति से किसी ग्रह या उपग्रह की सतह से टकराता है तो किस प्रकार प्रभाव गर्त (Impact Crater) बनता है। अलग-अलग आकार और गति के प्रभावों का प्रदर्शन कर वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया गया।

ग्रह सुरक्षा अभियानों की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विज्ञान संचारकों ने पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रहों (Near-Earth Asteroids), अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रह सुरक्षा अभियानों और भविष्य में संभावित खतरों से निपटने के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।

आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और आम लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना तथा अंतरिक्ष विज्ञान को सरल, रोचक और अनुभव आधारित तरीके से जन-जन तक पहुंचाना रहा। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे आयोजन युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और भविष्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Related Articles