भोपाल में पूर्व IAS अरविंद जोशी और टीनू जोशी पर ED की बड़ी कार्रवाई, 22.46 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा, क्रिकेट अकादमी, होटल और रिसॉर्ट समेत कई परिसंपत्तियां जांच के दायरे में
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आय से अधिक संपत्ति और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत करीब 22.46 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।
ED की कार्रवाई में भोपाल के सेमरी बाज्याफ्त गांव में स्थित क्रिकेट अकादमी, होटल, रिसॉर्ट और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन परिसंपत्तियों का संबंध कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित धन से जुड़ा हुआ है।
लोकायुक्त FIR के आधार पर शुरू हुई थी जांच
प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि जोशी दंपती ने अपने पद पर रहते हुए आय से अधिक लगभग 41.87 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की।
ED के अनुसार, जांच के दौरान सामने आया कि कथित अवैध संपत्तियों को छिपाने और उनका उपयोग करने के लिए कई स्तरों पर वित्तीय लेन-देन किए गए। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि संपत्तियों की वास्तविक प्रकृति और स्वामित्व को छिपाने के लिए बेनामी संस्थाओं, फर्जी समझौतों और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
क्रिकेट अकादमी में निवेश पर भी जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, सेमरी बाज्याफ्त स्थित क्रिकेट अकादमी में भी सहयोगियों के माध्यम से निवेश किए जाने की बात सामने आई है। ED इस बात की जांच कर रही है कि इन निवेशों में कथित अवैध धन का इस्तेमाल किया गया या नहीं।
पहले भी हो चुकी है संपत्ति अटैच
यह पहली बार नहीं है जब ED ने इस मामले में कार्रवाई की है। इससे पहले भी एजेंसी करीब 13.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है।
क्या है PMLA के तहत कार्रवाई
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ED उन मामलों की जांच करती है, जिनमें अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने या छिपाने का आरोप होता है। जांच के दौरान एजेंसी को अधिकार होता है कि वह संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर सके। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है।
ED की कार्रवाई के बाद अब संबंधित संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की आगे की जांच जारी है।