चाइना प्लस वन’ से भारतीय फोर्जिंग उद्योग के लिए बढ़े अवसर

AIFI के सम्मेलन में तकनीक, ऑटोमेशन और कुशल जनशक्ति पर जोर
पुणे, 15 सितंबर। एसोसिएशन ऑफ इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री (AIFI) के दूसरे वार्षिक सम्मेलन में भारतीय फोर्जिंग उद्योग के सामने उभर रहे अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। ‘न्यू डेवलपमेंट ट्रेंड्स-इम्पैक्ट ऑन फोर्जिंग इंडस्ट्री’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव, ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति, तकनीक, ऑटोमेशन, उत्पादकता, कुशल जनशक्ति और बढ़ती लागत जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
AIFI के अध्यक्ष और वर्षा फोर्जिंग्स के सीईओ यश मुनोट ने कहा कि वैश्विक कंपनियों द्वारा आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने से भारत के लिए अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग को उत्पादकता बढ़ाने के साथ तकनीक, कौशल विकास, नवाचार और स्थिरता में निवेश बढ़ाना होगा।
मुख्य अतिथि बीएमडब्ल्यू ग्रुप प्लांट चेन्नई के प्रबंध निदेशक थॉमस डोज़ ने कहा कि भारत के पास इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़ा घरेलू बाजार और सक्षम फोर्जिंग उद्योग है। उनके अनुसार ‘चाइना प्लस वन’ अवसर केवल विनिर्माण और आपूर्ति तक सीमित नहीं है। वैश्विक कंपनियां ऐसे भारतीय साझेदार चाहती हैं जो इंजीनियरिंग, उत्पाद विकास और पूरी विकास प्रक्रिया में जिम्मेदारी ले सकें।
सम्मेलन में PwC के कार्यकारी निदेशक योगेश ठाकर ने भारतीय फोर्जिंग उद्योग की वैश्विक संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। वहीं मांग में संभावित वृद्धि को लेकर पैनल चर्चा में जीएसटी, ऑटोमेशन, तकनीकी उन्नयन, निवेश, प्रशिक्षण, आरएंडडी, उत्पादकता और आकस्मिक योजना जैसे विषयों पर विचार हुआ। विशेषज्ञों ने बदलते बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए तकनीक और कौशल में लगातार निवेश की जरूरत बताई।





