
इटारसी/भोपाल। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ (WCRMS) के मुख्य शाखा कार्यालय से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित फोटो, वीडियो और अन्य सामग्री वायरल होने के बाद संगठन के सदस्यों एवं कर्मचारियों के बीच चर्चा का माहौल है। वायरल सामग्री में कुछ पदाधिकारियों पर संगठन की गरिमा के विपरीत आचरण, वित्तीय अनियमितताओं तथा अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की
आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में प्रीतम तिवारी, योगेश चौरे, रविंद्र चौधरी, सौरभ गुप्ता, नितिन परमार, राजीव रंजन तथा अमर सिंह यादव सहित कुछ अन्य पदाधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। इन व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों, रेलवे प्रशासन अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा होना अभी शेष है।
संगठन से जुड़े कई सदस्यों ने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी भी पदाधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो उसके खिलाफ संगठन के संविधान, रेलवे सेवा नियमों और प्रचलित कानून के अनुसार कठोर अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सदस्यों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी संगठन की विश्वसनीयता उसके पदाधिकारियों के आचरण, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित होती है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना आवश्यक है, ताकि संगठन की साख और कर्मचारियों का विश्वास कायम रह सके।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री और संबंधित सदस्यों द्वारा उठाई गई मांगों पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त होना शेष है।






