भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर लगेगी लगाम, जिला प्रशासन ने गठित किया कॉलोनी सेल; एडीएम सुमित पांडेय को जिम्मेदारी
भोपाल। शहर में तेजी से विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के साथ अब कॉलोनाइजर और डेवलपर्स की गतिविधियों पर निगरानी के लिए जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था शुरू की है। आम लोगों को प्लॉट और मकान खरीदने में होने वाली धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से भोपाल में कॉलोनी सेल का गठन किया गया है।
इस सेल की जिम्मेदारी एडीएम सुमित पांडेय को सौंपी गई है। कॉलोनी सेल शहर में विकसित हो रही सभी आवासीय कॉलोनियों के विकास कार्यों, अनुमतियों और कॉलोनाइजर की जवाबदेही की निगरानी करेगा।
कॉलोनियों की वैधता और लाइसेंस प्रक्रिया होगी नियंत्रित
जिला प्रशासन के अनुसार, कॉलोनी सेल के माध्यम से कॉलोनाइजर को जारी होने वाले लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा किसी कॉलोनी को वैध या अवैध घोषित करने और उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का संचालन भी इसी सेल के माध्यम से होगा।
आने वाले समय में कॉलोनाइजर और रहवासियों के बीच विकास कार्यों, विशेष रूप से पेयजल आपूर्ति, सड़क, ड्रेनेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर होने वाले विवादों के समाधान की जिम्मेदारी भी कॉलोनी सेल निभाएगा।
बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों पर कार्रवाई
शहर के बाहरी क्षेत्रों में कई स्थानों पर कथित कॉलोनाइजर और डेवलपर कृषि भूमि का डायवर्जन कराए बिना फार्म हाउस के नाम पर प्लॉट बेच रहे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) और रेरा से जरूरी अनुमतियां नहीं ली जाती हैं।
इसका खामियाजा प्लॉट खरीदने वाले लोगों को बाद में भुगतना पड़ता है। अवैध कॉलोनियों में सड़क, पेयजल, पार्क, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज सिस्टम और सीवेज नेटवर्क जैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो पातीं। कई बार कॉलोनी बेचने के बाद कॉलोनाइजर गायब हो जाते हैं और खरीदारों को समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्ट्रेट और नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
प्लॉट खरीदने से पहले मिलेगी पूरी जानकारी
कॉलोनी सेल बनने के बाद आम नागरिक किसी भी कॉलोनी या प्रोजेक्ट की वैधता की जानकारी यहां से ले सकेंगे। मकान या प्लॉट खरीदने से पहले उपभोक्ता यह पता कर सकेंगे कि संबंधित कॉलोनी को जरूरी अनुमतियां मिली हैं या नहीं।
कॉलोनी सेल की अनुमति के बाद ही कॉलोनाइजर को विकास कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। टीएंडसीपी से नक्शा स्वीकृत कराने और जमीन का डायवर्जन होने के बाद ही कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दी जाएगी।
वैध कॉलोनी में खरीदारों को मिलेगा लाभ
प्रशासन के अनुसार, अनुमति प्राप्त कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को बैंक से हाउसिंग लोन लेने, रजिस्ट्री और नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं में कम परेशानी होगी। साथ ही विकास कार्यों की जिम्मेदारी भी तय रहेगी।
भोपाल कलेक्टर ने कहा कि शहर में अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण और कॉलोनाइजर की जवाबदेही तय करने के लिए कॉलोनी सेल का गठन किया गया है। अब कॉलोनी विकास से जुड़ी अनुमतियां और अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी इसी सेल के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी।