ओंगोले में 55 एकड़ के इंटीग्रेटेड वेलनेस सेंटर की नींव, श्री श्री रवि शंकर ने किया भूमि पूजन

ओंगोले, आंध्र प्रदेश, 22 अगस्त। ईबीजी ग्रुप ने आंध्र प्रदेश के ओंगोले में वेलनेस आधारित एकीकृत विकास की शुरुआत की है। साई विष्णु चतुर्वाटिका में 55 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित होने वाले इस प्रोजेक्ट की भूमि पूजा आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने की।
इस एकीकृत विकास में कार्ल्टन वेलनेस रिट्रीट, श्री श्री पंचकर्म एंड तत्त्व सेंटर और श्री श्री रविशंकर विद्या मंदिर को एक ही पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य आतिथ्य, आयुर्वेद, शिक्षा, प्रकृति और समग्र जीवनशैली को एक स्थान पर जोड़ना है।
कार्ल्टन वेलनेस रिट्रीट का विकास ईबीजी रियल्टी करेगी, जबकि श्री श्री पंचकर्म एंड तत्त्व सेंटर और श्री श्री रविशंकर विद्या मंदिर का विकास आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा किया जाएगा। ईबीजी ग्रुप के अनुसार, तीनों परियोजनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित किया जाएगा।
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि ओंगोले का यह विकास वेलनेस, शिक्षा और समुदाय को एक साथ लाने का प्रयास है। उनके अनुसार, वास्तविक कुशलता केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, श्वास, मन और बुद्धि सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं की देखभाल से जुड़ी है।
ईबीजी ग्रुप के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. इरफान खान ने कहा कि परियोजना में स्वच्छ हवा, प्राकृतिक प्रकाश, समग्र उपचार और समुदाय आधारित जीवनशैली को शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विकास में कम-कार्बन प्रथाओं, जलवायु-अनुकूल डिजाइन और स्थानीय लैंडस्केपिंग पर भी जोर दिया जाएगा।
ईबीजी ग्रुप के ग्रुप प्रेसिडेंट सुरेश गोयल के अनुसार, परियोजना का प्रमुख हिस्सा कार्ल्टन वेलनेस रिट्रीट होगा। ईबीजी रियल्टी इसके विकास में 45 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश करेगी। करीब 1,05,139 वर्ग फुट क्षेत्र में बनने वाले रिट्रीट में 36 प्लॉट और 35 दो-बेडरूम विला प्रस्तावित हैं।
श्री श्री पंचकर्म एंड तत्त्व सेंटर में चिकित्सक-निर्देशित पंचकर्म, कायाकल्प और निवारक वेलनेस कार्यक्रम संचालित किए जाने की योजना है। वहीं, श्री श्री रविशंकर विद्या मंदिर में शिक्षा के साथ योग, ध्यान, चरित्र निर्माण, रचनात्मकता, पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति से जुड़ाव पर जोर दिया जाएगा।
ईबीजी ग्रुप के अनुसार, ओंगोले का यह प्रोजेक्ट वेलनेस, शिक्षा, प्रकृति और समुदाय को जोड़कर टियर-2 शहरों में नए तरह के गंतव्य-आधारित विकास का मॉडल प्रस्तुत करने की दिशा में एक पहल है।





