देवास पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के अंतरराज्यीय नेटवर्क का किया पर्दाफाश, 12 साइबर ठग गिरफ्तार


भोपाल, 23 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत देवास पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 54 लाख 84 हजार 725 रुपए की ठगी गई राशि बरामद की है।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप लागू ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के तहत की गई। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में पुलिस की 19 टीमों के 70 जवान शामिल रहे।
17 राज्यों के 33 जिलों में 127 दिन चला अभियान
देवास के कोतवाली थाना क्षेत्र के एक नागरिक से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63 लाख 52 हजार रुपए की साइबर ठगी की शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का पीछा करते हुए पुलिस राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 17 राज्यों के 33 जिलों तक पहुंची।
पुलिस टीमों ने करीब 127 दिनों तक कार्रवाई की और लगभग 58,315 किलोमीटर की दूरी तय कर संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
ऐसे करते थे डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी
जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर लोगों को फोन और वीडियो कॉल करते थे। इसके बाद पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता था।
फर्जी जांच और अदालत जैसी परिस्थितियां बनाकर पीड़ित से बैंकिंग एवं निवेश संबंधी जानकारी हासिल की जाती थी। इसके बाद जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती और उसे कई खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
पुलिस ने बैंकिंग चैनल की अलग-अलग कड़ियों को ट्रेस कर आरोपियों तक पहुंच बनाई। कार्रवाई में करीब 54.84 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। इसके अलावा बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री भी जब्त की गई है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान
मध्यप्रदेश पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल करे और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो सावधान रहें।
किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को सुरक्षित कराने और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।





