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हलालपुर पटाखा बाजार पर प्रशासन की नजर, लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू

15 से अधिक दुकानों में सिर्फ 7 के लाइसेंस वैध होने की जानकारी, 2025 से कई लाइसेंस नहीं हुए रिन्यू

भोपाल। हलालपुर स्थित सोनी पटाखा दुकान में शुक्रवार को हुई आगजनी की घटना के बाद जिला प्रशासन ने पटाखा बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंस की जांच तेज कर दी है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि हलालपुर पटाखा बाजार में कितने व्यापारियों को वैध लाइसेंस जारी किए गए हैं, कितनों का नवीनीकरण हुआ है और कौन-कौन से व्यापारी सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार जांच लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितनी दुकानों के लाइसेंस वैध हैं और कितनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है। बिना लाइसेंस या नियमों के विपरीत संचालित दुकानों पर कार्रवाई की जाएगी।

15 से अधिक दुकानें, सात लाइसेंस होने की जानकारी

हलालपुर पटाखा बाजार में वर्तमान में 15 से अधिक पटाखा दुकानें संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से केवल सात दुकानों के पास वैध लाइसेंस होने की बात कही जा रही है। वहीं वर्ष 2025 के बाद कई पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।

अब प्रशासन यह जांच कर रहा है कि बिना लाइसेंस दुकान संचालन, निर्धारित सीमा से अधिक पटाखा भंडारण, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और अन्य नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

बैरागढ़ कलां में शिफ्टिंग का प्रस्ताव

हलालपुर पटाखा बाजार को भीड़भाड़ वाले क्षेत्र से हटाकर बैरागढ़ कलां में शिफ्ट करने की योजना पर भी प्रशासन काम कर रहा है। इसके लिए प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।

इस संबंध में एडीएम सुमित कुमार पांडेय जल्द ही पटाखा कारोबारियों के साथ बैठक कर सकते हैं। हालांकि, पूर्व में पटाखा व्यापारियों ने शिफ्टिंग के विरोध में न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त किया था। अब प्रशासन की कानूनी टीम इस मामले की समीक्षा कर रही है और स्टे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।

देवास हादसे के बाद जांच पर उठे सवाल

पटाखा बाजारों में सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। देवास में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने हलालपुर पटाखा बाजार की दुकानों और गोदामों की जांच की थी। उस दौरान स्टॉक और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की गई थी।

हालांकि, आरोप हैं कि यह जांच औपचारिकता तक सीमित रही और प्रभावी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित नहीं किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले की जांच में सख्ती बरती जाती और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई होती तो सोनी पटाखा दुकान में हुई घटना को रोका जा सकता था।

प्रशासन जल्द बुलाएगा कारोबारियों की बैठक

एडीएम सुमित कुमार पांडेय ने बताया कि पटाखा दुकानों की जांच की जा रही है, जो लगभग पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही लाइसेंस और नियमों की स्थिति स्पष्ट होगी।

उन्होंने कहा कि पटाखा बाजार की शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है, लेकिन न्यायालय के स्टे के कारण आगे की कार्रवाई रुकी हुई है। जल्द ही पटाखा कारोबारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और सुरक्षा मानकों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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