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शिक्षकों को राहत: ई-अटेंडेंस के लिए सुबह 9:45 बजे की बाध्यता खत्म

आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह से शिक्षक संघ की वार्ता के बाद फैसला, 10:30 बजे तक उपस्थिति दर्ज करने की अपेक्षा

भोपाल। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के बीच 11 अगस्त 2026 को हुई वार्ता के बाद शिक्षकों को ई-अटेंडेंस को लेकर राहत मिली है। अब शिक्षकों के लिए सुबह 9:45 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है।

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त के सामने नेटवर्क सहित अन्य तकनीकी समस्याओं का मुद्दा उठाया। संघ ने कहा कि ई-अटेंडेंस के लिए पर्याप्त समय का अंतराल होना चाहिए, ताकि शिक्षक तकनीकी समस्या के कारण परेशान न हों।

आयुक्त ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों का निर्धारित समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक है। सभी लोक सेवकों से सुबह 10:30 बजे तक अपनी उपस्थिति दर्ज करने की अपेक्षा की गई है। संघ ने टाइम-इन और टाइम-आउट की सुविधा पहले की तरह बनाए रखने की मांग भी रखी। चर्चा के दौरान 10:45 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करने की सुविधा देने पर सहमति बनी।

संघ ने एक ही परिसर में संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से निर्धारित समय के अनुसार सुबह 10:30 बजे तक उपस्थिति दर्ज करने का आग्रह किया है।

शिक्षक एप के अन्य फीचर्स पर भी चर्चा

बैठक में शिक्षक एप पर उपलब्ध नहीं होने वाले विभिन्न फीचर्स को लेकर भी चर्चा हुई। इनमें मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों के प्रदेश, संभाग, जिला, नगर, विकासखंड और तहसील स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों को मिलने वाले विशेष अवकाश, महिलाओं के लिए विशेष अवकाश, लघुकृत अवकाश और मध्यांतर से पहले हाफ-डे लेकर विद्यालय पहुंचने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अलावा ऑन-ड्यूटी विकल्प में कर्मचारियों और अधिकारियों को अन्य स्थान से भी लॉगआउट करने की सुविधा तथा मध्यांतर के बाद ऑन-ड्यूटी की सुविधा देने का मुद्दा भी उठाया गया।

तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए टीम बनेगी

संघ के सुझाव पर तकनीकी समस्याओं और अन्य असुविधाओं के समाधान के लिए एक सहायक टीम गठित करने की बात कही गई। इसमें तकनीकी जानकारी रखने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम लोक शिक्षण संचालनालय के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ समन्वय करेगी।

बाढ़ और रास्ता बंद होने पर शिक्षकों को राहत

बैठक में खराब मौसम और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में शिक्षकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। आयुक्त ने आश्वस्त किया कि नदी-नालों में बाढ़ या विद्यालय पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में किसी शिक्षक-शिक्षिका को अपनी जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुंचने की आवश्यकता नहीं है।

ऐसी स्थिति में संबंधित लोक सेवक को अपने संकुल प्राचार्य या संस्था प्रभारी को सूचना देकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराना होगा। ऐसे मामलों में परिस्थितियों के अनुसार शिक्षक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का आश्वासन दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल में ये पदाधिकारी रहे शामिल

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर, प्रदेश सचिव श्रीमती संध्या नाईक, संभाग अध्यक्ष विकास सिंह चौहान, संभागीय संगठन मंत्री विनोद मालवीय, जिला अध्यक्ष नागेश पांडेय, जिला उपाध्यक्ष रामकिशोर यादव, महानगर अध्यक्ष अवनीश श्रीवास्तव, कोलार तहसील अध्यक्ष अशोक जाट, फंदा विकासखंड अध्यक्ष अर्चना शर्मा, सचिव लखन सिंह सैंगर सहित मनीष यादव, कृष्ण कुमार ठाकुर, रविंद्र गुप्ता, चंद्रेश सिंह चौहान, अमित श्रीवास्तव, सुनील दुबे, श्रीकांत नाईक, उमेश चौधरी और संजय शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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