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नर्सिंग परीक्षा और रिजल्ट में देरी पर छात्रों का प्रदर्शन, अधिकारियों पर स्याही फेंकी

छह साल से परीक्षा-परिणाम का इंतजार, एनएसओ का नर्सिंग काउंसिल में चौथे दिन भी धरना जारी

भोपाल। नर्सिंग परीक्षा और परिणाम में लगातार हो रही देरी से नाराज छात्रों ने मंगलवार को भोपाल स्थित नर्सिंग काउंसिल कार्यालय में प्रदर्शन किया। करीब छह साल से परीक्षा और रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्रों ने अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा अधिकारियों पर स्याही फेंकने की घटना भी सामने आई।

छात्रों का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं चाहिए। लंबित परीक्षाएं आयोजित कर जल्द परिणाम जारी किए जाएं, ताकि उनकी पढ़ाई और करियर आगे बढ़ सके। एनएसओ छात्र संगठन का काउंसिल परिसर में चौथे दिन भी धरना जारी रहा। संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम चिकित्सा शिक्षा संचालक बीनू कुशवाहा को ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगें रखीं।

लंबित परीक्षा-रिजल्ट से छात्रों का भविष्य प्रभावित

छात्र संगठन के अनुसार वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में कई नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी अब तक परीक्षा और परिणाम को लेकर परेशान हैं। संगठन का आरोप है कि कुछ नर्सिंग कॉलेजों में सामने आई अनियमितताओं और कई कॉलेजों के अपात्र घोषित होने का असर विद्यार्थियों पर पड़ा है।

छात्रों के मुताबिक कई विद्यार्थियों की अंतिम वर्ष की परीक्षा तक नहीं हुई है, जबकि कुछ पुराने परिणाम भी लंबित हैं। इसके चलते विद्यार्थियों की डिग्री, पंजीयन, आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों ने कहा कि छह साल से इंतजार कर रहे विद्यार्थियों की समस्या का अब स्थायी समाधान होना चाहिए।

छात्रवृत्ति और कॉलेजों की मान्यता का मुद्दा भी उठाया

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एससी, एसटी और ओबीसी विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति जारी करने की मांग की। साथ ही सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति देने की मांग रखी गई।

संगठन ने नर्सिंग कॉलेजों के कथित फर्जी निरीक्षण और मान्यता प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को दोबारा जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी से जोड़ने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

छात्र संगठन ने कहा कि लंबित परीक्षा, परिणाम, पंजीयन और छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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