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अमीरी और गरीबी के बीच बढ़ती खाई चिंतनीय पहलू।

लेखक : शैलेश सिंह कुशवाह, वरिष्ठ पत्रकार
आज देश में अमीरी और गरीबी के बीच दिन दिन दूरियां बढ़ रही है जो भारत सरकार और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है। आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत फूलों का बाजार है जहां वह भारतीय एवं भारतीय बाजार का लुफ्त उठा रहे हैं और भारत से करोड़ों अरबों रूपए का व्यापार कर रहे हैं। भारतीय पूंजीपतिइनके साथ मिलकर खुद को सम्पन्न बना रहे हैं और देश का युवा,गरीब दिन दिन गरीबी की दुनिया में जीने को मजबूर है। गरीब दिन दिन गरीब बन रहा है और अमीर दिन प्रतिदिन अमीर और सम्पन्न हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बात को लेकर चिंतित नजर आए। अगर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये तो भविष्य में पछताना पड़ेगा। देश में मोदी सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। अन्यथा भविष्य अंधकार मय है। देश में नई व्यवस्था ऐसी बनाई जाए जिसमें अमीर और गरीब दोनों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो ओर दोनों के बीच की दूरी जो दिन दिन बढ़ रही है उसे कम किया जा सके। इसी में हमारी सुरक्षा निहित है। इसी में राष्ट्र की भलाई छिपी है। शैलेश सिंह कुशवाह वरिष्ठ पत्रकार ग्वालियर

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