दो महीने से गंदा पानी पीने को मजबूर 10 हजार लोग, विश्वकर्मा नगर में दूषित जलापूर्ति से बढ़ी चिंता

भोपाल। राजधानी के वार्ड क्रमांक 78 स्थित विश्वकर्मा नगर और आसपास की कॉलोनियों के करीब 10 हजार लोग पिछले दो महीने से दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति से परेशान हैं। रहवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने अब तक समस्या का समाधान नहीं किया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नलों से मटमैला, दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। कई घरों में पानी के साथ गाद और गंदगी भी निकल रही है। इससे लोगों को पीने के लिए पानी खरीदना या उबालकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में दूषित पानी से जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
रहवासियों का कहना है कि उन्होंने जोन की जलकार्य इंजीनियर सहित नगर निगम के अधिकारियों को कई बार शिकायत की और गंदे पानी के नमूने भी दिखाए, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उनका आरोप है कि पेयजल पाइपलाइन में लीकेज होने से नालियों का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है, लेकिन पाइपलाइन की जांच और मरम्मत नहीं कराई गई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लगातार दो महीने तक दूषित पानी की आपूर्ति होना प्रशासन की गंभीर लापरवाही है और इससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने तत्काल पाइपलाइन की जांच, लीकेज दुरुस्त करने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
विश्वकर्मा नगर यूनियन कार्बाइड परिसर के निकट स्थित होने के कारण पहले से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। रहवासियों का कहना है कि ऐसे क्षेत्र में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी की आवश्यकता है, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
नगर निगम का पक्ष: इस संबंध में नगर निगम का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।





