भोपाल केंद्रीय जेल में तनाव प्रबंधन पर विशेष व्याख्यान, 800 बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य और विधिक सहायता की दी गई जानकारी
भोपाल केंद्रीय जेल में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और इस्कॉन के सहयोग से तनाव प्रबंधन एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। करीब 800 बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य, क्रोध नियंत्रण और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी गई।
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में केंद्रीय जेल भोपाल में तनाव प्रबंधन एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल के सचिव एवं न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल की उपस्थिति रही।
इस्कॉन प्रचारकों ने बताए तनाव और क्रोध पर नियंत्रण के उपाय
कार्यक्रम में इस्कॉन के प्रचारक धर्मेंद्र कृष्ण, गिरिधारी गोविन्द दास, अंबुजाक्ष दास तथा बृहद मृदंग दास ने तनाव प्रबंधन विषय पर व्याख्यान दिए।
उन्होंने बताया कि मानसिक तनाव, क्रोध, लालच, अहंकार और अन्य नकारात्मक भावनाएं व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इनके कारण पारिवारिक और सामाजिक जीवन में असंतुलन उत्पन्न होता है तथा कई बार व्यक्ति अपराध की ओर अग्रसर हो जाता है, जिसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
प्रचारकों ने बंदियों को मानसिक शांति बनाए रखने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक अभ्यास के माध्यम से तनाव कम करने के उपाय भी बताए।
बंदियों को दी गई निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी
कार्यक्रम के साथ ही बंदियों के लिए विधिक जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनीत अग्रवाल ने केंद्रीय जेल का निरीक्षण किया और बंदियों से उनके लंबित प्रकरणों तथा अधिवक्ता उपलब्ध होने की जानकारी ली।
उन्होंने पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जरूरतमंद बंदी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
बड़ी संख्या में बंदी और जेल अधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में केंद्रीय जेल भोपाल के अतिरिक्त अधीक्षक एम. एस. मरावी, जेलर दिनेश मुवेल, अष्टकोण प्रभारी सहित जेल प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 800 बंदियों ने भाग लिया।
जेल प्रशासन के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें कानूनी अधिकारों एवं उपलब्ध सहायता योजनाओं के प्रति जागरूक करना है।