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आईसेक्ट इंडिया के 40 वर्ष: ग्रामीण भारत में शिक्षा, कौशल और डिजिटल सशक्तीकरण की परिवर्तनकारी यात्रा

आईसेक्ट इंडिया ने चार दशकों में ग्रामीण भारत में शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तीकरण और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। जानिए 1985 से 2026 तक की इसकी विकास यात्रा।

आईसेक्ट इंडिया के चार दशक: शिक्षा, कौशल और डिजिटल सशक्तीकरण से ग्रामीण भारत में बदलाव की प्रेरक यात्रा

भोपाल। भारत के समग्र विकास की अवधारणा तभी सार्थक मानी जाती है, जब उसके लाभ गांवों, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचें। शिक्षा और तकनीकी विकास के क्षेत्र में लंबे समय तक यह चुनौती बनी रही कि आधुनिक शिक्षा और डिजिटल संसाधन मुख्यतः महानगरों और बड़े शहरों तक ही सीमित रहे। ऐसे समय में एक दूरदर्शी पहल ने ग्रामीण भारत में शिक्षा और कौशल विकास की नई नींव रखी। यही पहल आगे चलकर आईसेक्ट इंडिया के रूप में देश की प्रमुख शिक्षा एवं कौशल विकास संस्थाओं में शामिल हुई।

1985 में रखी गई परिवर्तन की नींव

वर्ष 1985 में वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं चिंतक संतोष चौबे ने ऑल इंडिया सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना।

उनकी दृष्टि में शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का प्रभावी साधन थी। यही विचार आगे चलकर संस्था की कार्यसंस्कृति और विस्तार का आधार बना।

भोपाल से शुरू हुई तकनीकी शिक्षा की नई पहल

वर्ष 1986 में भोपाल में पहला आईसेक्ट प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। यह केवल कंप्यूटर शिक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

संस्था ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें ही प्रशिक्षक बनाया। इससे न केवल तकनीकी शिक्षा का विस्तार हुआ, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को भी बढ़ावा मिला।

कौशल विकास को बनाया आत्मनिर्भरता का माध्यम

वर्ष 1995 आईसेक्ट की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इस दौरान संस्था ने बहुउद्देशीय प्रशिक्षण केंद्र मॉडल विकसित किया, जहां शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और सामुदायिक विकास को एकीकृत किया गया।

इसके साथ अधिकृत केंद्र (ऑथराइज्ड सेंटर) मॉडल के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को जोड़ा गया। इससे तकनीकी शिक्षा के प्रसार के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी विकसित हुए।

2003 के बाद मिला संगठित विस्तार

वर्ष 2003 में आईसेक्ट लिमिटेड की स्थापना के साथ संस्था ने शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के कार्यक्रमों को अधिक संगठित स्वरूप दिया। इस चरण में आईसेक्ट ने स्वयं को केवल प्रशिक्षण संस्था तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास को जोड़ने वाले व्यापक मॉडल के रूप में विकसित किया।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत पहचान

तकनीकी प्रशिक्षण के बाद आईसेक्ट ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।

इस क्रम में विभिन्न राज्यों में विश्वविद्यालय स्थापित किए गए—

– 2005 – डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
– 2010 – रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल
– 2016 – आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग (झारखंड)
– 2018 – डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली (बिहार) एवं खंडवा (मध्यप्रदेश)
– 2023 – स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल

इन संस्थानों में कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग-शिक्षा समन्वय और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।

डिजिटल भारत के साथ बढ़ाया कदम

डिजिटल तकनीकों के तेजी से विस्तार के दौर में आईसेक्ट ने ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक आधुनिक सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया। इससे हजारों युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने और रोजगार के नए अवसर प्राप्त करने में सहायता मिली।

2026 में बनी नई पहचान – आईसेक्ट इंडिया

चार दशकों की यात्रा के बाद वर्ष 2026 में संस्था ने आईसेक्ट इंडिया के रूप में नई पहचान अपनाई। यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि भविष्य उन्मुख शिक्षा, कौशल, अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल सशक्तीकरण के व्यापक दृष्टिकोण का प्रतीक है।

संस्था का उद्देश्य अब भी वही है—ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगारोन्मुख कौशल से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना।

ग्रामीण भारत को बनाया विकास का केंद्र

आईसेक्ट इंडिया की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उसने विकास की मुख्यधारा में ग्रामीण भारत को केंद्र में रखा। स्थानीय समुदायों की भागीदारी, युवाओं को अवसर, कौशल आधारित शिक्षा और तकनीकी सशक्तीकरण के माध्यम से संस्था ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाने का प्रयास किया।

आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल नवाचार की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में आईसेक्ट इंडिया के चार दशक इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा गांवों तक पहुंचती है और युवाओं को अवसर मिलते हैं, तब परिवर्तन केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और राष्ट्र के सतत विकास की आधारशिला बनता है।

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