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पैसे दोगुने करने का झांसा देकर 2 करोड़ की ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश; 14 आरोपी गिरफ्तार

10 राज्यों में 30 हजार किमी पीछा, 35 दिन की कार्रवाई और 3 हजार CCTV फुटेज खंगालने के बाद मिली सफलता

भोपाल, 27 अगस्त 2026।

पैसे दोगुने करने का लालच देकर करीब 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का राजगढ़ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ऑपरेशन ‘मनी ट्रेप’ के तहत कार्रवाई करते हुए गिरोह के 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 73 लाख रुपये नकद, चार चार पहिया वाहन और 19 एंड्रॉयड मोबाइल समेत करीब 2 करोड़ 92 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन में संगठित और अंतरराज्यीय अपराधों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत यह सफलता मिली है।

फर्जी दस्तावेज दिखाकर निवेश के नाम पर ठगी

24 जुलाई को ब्यावरा निवासी एक व्यक्ति ने ब्यावरा शहर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने खुद को बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच दिया। फर्जी ई-मेल, दस्तावेज और भुगतान संबंधी संदेश दिखाकर फरियादी का विश्वास जीता गया।

आरोपियों ने 2 करोड़ रुपये निवेश करने पर बड़ी रकम वापस देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद भोपाल में फरियादी से 2 करोड़ रुपये नकद लिए गए। राशि प्राप्त करने के बाद आरोपियों ने हवाला/आंगड़िया के जरिए भुगतान किए जाने का विश्वास दिलाने के लिए 4 करोड़ रुपये के RTGS का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाया और फरार हो गए। रकम वापस नहीं मिलने पर फरियादी को ठगी का पता चला।

10 राज्यों में 30 हजार किमी तक पीछा

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगढ़ पुलिस अधीक्षक ने 10 विशेष टीमें गठित कीं। पुलिस ने आरोपियों के मूवमेंट और नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए 3 हजार से अधिक CCTV फुटेज का विश्लेषण किया। करीब 35 दिनों तक 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत 10 राज्यों में दबिश दी गई। इसके बाद 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

होटल में बैठक, फर्जी कंपनी और आंगड़िया नेटवर्क

जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से कई स्तरों पर काम करता था। पहले ऐसे लोगों की पहचान की जाती थी, जिन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए तैयार किया जा सके। इसके बाद महंगी गाड़ियों, होटलों में बैठकों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कंपनी का प्रतिनिधि बनकर विश्वास हासिल किया जाता था।

गिरोह के सदस्य कंपनी के कर्मचारी, एजेंट, चार्टर्ड अकाउंटेंट और डायरेक्टर बनकर पीड़ित से संपर्क करते थे। भोपाल और ब्यावरा के होटलों में बैठकों के बाद भोपाल के जहांगीराबाद स्थित एक कोरियर कार्यालय में 2 करोड़ रुपये नकद लिए गए। इसके बाद फर्जी RTGS स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ित को भ्रमित किया गया।

रकम को हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग शहरों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद आरोपी रकम बांटकर अपने मोबाइल नंबर, ठिकाने और शहर बदल देते थे। गिरोह के सदस्य वास्तविक नाम की जगह ट्रेड नाम का इस्तेमाल करते थे और सामान्यतः अपने ऊपर और नीचे की लिंक से ही संपर्क रखते थे, ताकि किसी एक आरोपी को पूरे नेटवर्क की जानकारी न हो।

इंदौर में भी थी ठगी की तैयारी

जांच के दौरान पता चला कि गिरोह इंदौर में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की योजना बना रहा था, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी के कारण योजना सफल नहीं हो सकी। प्रारंभिक जांच में पश्चिम बंगाल में करीब 50 लाख रुपये और दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी से भी करीब 50 लाख रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

गिरोह से जुड़े लोगों के कार्यालय उदयपुर, पश्चिम बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली और मुंबई सहित कई स्थानों पर संचालित होने की जानकारी मिली है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर फर्जी कंपनियों, ई-मेल, बैंक खातों, हवाला/आंगड़िया नेटवर्क और ठगी की रकम के लेन-देन से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। जब्त मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच भी जारी है।

कई राज्यों की पुलिस ने किया सहयोग

कार्रवाई में राजगढ़ पुलिस की टीमों के साथ मुंबई, नांदेड़, लातूर, भदोही, पुणे, हैदराबाद, केरल, तेलंगाना और भोपाल सहित विभिन्न स्थानों की पुलिस इकाइयों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और रकम बरामदगी में सहयोग किया।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कम समय में पैसा दोगुना करने या अत्यधिक लाभ का लालच देने वाली निवेश योजनाओं पर भरोसा न करें। किसी भी कंपनी, व्यक्ति या निवेश योजना की आधिकारिक माध्यम से पूरी जानकारी सत्यापित करने के बाद ही निवेश करें। धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।

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