भोपाल। आज के दौर में जहां युवा उच्च शिक्षा के बाद बड़े पद और आकर्षक पैकेज की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं कुछ जैन युवाओं ने उच्च शिक्षा और परिवार की सुख-सुविधाओं का त्याग कर आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग को चुना है। ऐसे ही उच्च शिक्षित ब्रह्मचारी भाइयों की आगामी मुनि दीक्षा से पहले भोपाल के नंदीश्वर जिनालय में गोद भराई की रस्म आयोजित की गई।
कार्यक्रम में ब्रह्मचारी भाइयों ने आचार्य समय सागर महाराज का ससंघ दर्शन कर श्रीफल अर्पित किया और आशीर्वाद लिया। आचार्य श्री ने उन्हें अपने चुने हुए मार्ग पर निर्दोष चर्या के साथ आगे बढ़ने, मन को स्थिर रखने और आत्मसंयम के जरिए कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने की प्रेरणा दी।
इसके बाद श्री शांतिनाथ जिनालय, जैन नगर में उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज ससंघ को भी श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया गया।
मंगल गीतों के साथ हुई गोद भराई
नंदीश्वर जिनालय में मंगल गीतों के साथ गोद भराई की रस्म हुई। ब्रह्मचारिणी बहनों ने रक्षाबंधन से पहले वात्सल्य और रक्षा सूत्र बांधकर भविष्य के वीतरागी संतों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। समाज के लोगों ने भी उनके त्याग और वैराग्य की अनुमोदना की।
समाज प्रवक्ता अंशुल जैन और सोशल मीडिया प्रभारी सौरभ इंजीनियर ने बताया कि इन सभी ब्रह्मचारी भाइयों की मुनि दीक्षा आगामी माह दिल्ली में आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के करकमलों से प्रस्तावित है।
सीए और एमसीए के बाद चुना संयम का मार्ग
प्रतापगढ़, राजस्थान के 31 वर्षीय बाल ब्रह्मचारी अंकित भैया ने सीए, एमसीए तथा नेट-जेआरएफ जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। उनके अनुसार वर्ष 2022 में यूट्यूब के माध्यम से आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के प्रवचन सुनने के बाद उनके जीवन में बदलाव आया। वर्ष 2023 में बड़ौत, उत्तर प्रदेश में उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया।
उनके सहयोग और सेवा भाव का उदाहरण हॉस्टल के दिनों में देखने को मिला, जब एक मित्र के गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने पर उन्होंने रातभर उसकी सेवा की। अगले दिन सीए की परीक्षा देकर उन्होंने मेरिट में सफलता हासिल की।
कंपनी का ज्वाइनिंग लेटर छोड़ वैराग्य पथ चुना
मुंबई के 22 वर्षीय बाल ब्रह्मचारी अनिकेत भैया ने इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा किया है। 10 वर्ष की उम्र में भिंड में आचार्य के दर्शन के बाद उन्हें आध्यात्मिक प्रेरणा मिली। बाद में निजी कंपनी का ज्वाइनिंग लेटर मिलने के बावजूद उन्होंने नौकरी छोड़कर आत्मकल्याण का मार्ग चुना।
भिंड के यश भैया ने वर्ष 2023 में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया। उनके परिवार के सभी सदस्य व्रतधारी बताए गए हैं।
कंप्यूटर इंजीनियर ने छोड़ी नौकरी
मुंबई के 32 वर्षीय बाल ब्रह्मचारी प्रसन्न भैया ने कंप्यूटर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर संयम का मार्ग चुना। उनके परिवार में सबसे बड़े भाई मुनि हैं, जबकि तीसरे भाई डॉक्टर हैं।
बड़ौत, उत्तर प्रदेश के वकील भैया ने बीएड के बाद निजी स्कूल में प्राचार्य के पद पर कार्य किया। बाद में उन्होंने वह पद छोड़कर संघ में प्रवेश किया।
एमबीए इंजीनियर ने छोड़ी बड़ी कंपनी की नौकरी
उदयपुर, राजस्थान के 38 वर्षीय बाल ब्रह्मचारी अक्षय भैया ने एमबीए और इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। मुंबई की एक बड़ी कंपनी में एरिया मैनेजर के पद पर कार्य करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर आचार्य सागर महाराज की शरण ग्रहण की।
वर्तमान में वे देश-विदेश में जिन शासन का संदेश पहुंचा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और न्यूजीलैंड सहित विभिन्न देशों में प्रवचन दिए। वर्तमान में वे देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित गोद भराई की रस्मों के निर्देशन में भी सहयोग कर रहे हैं।
