
भोपाल। भारतीय रेलवे में सुरक्षित रेल संचालन केवल तकनीकी प्रणालियों पर ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सतर्कता, अनुभव और त्वरित निर्णय क्षमता पर भी निर्भर करता है। इसी उत्कृष्ट कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से भोपाल रेल मंडल ने उन कर्मचारियों को सम्मानित किया है जिन्होंने अपनी सजगता से संभावित दुर्घटनाओं को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) पंकज त्यागी ने पांच रेल कर्मचारियों को “संरक्षा अवार्ड” प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मानित कर्मचारियों ने विभिन्न अवसरों पर रेल परिचालन के दौरान तकनीकी खामियों, ट्रैक संबंधी असामान्य स्थितियों और कोचों में उत्पन्न दोषों की समय रहते पहचान कर सुरक्षा सुनिश्चित की।
संरक्षा संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास
रेलवे में “सेफ्टी फर्स्ट” की अवधारणा को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। लाखों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रैक निरीक्षण, ट्रेन संचालन, सिग्नलिंग और तकनीकी निगरानी में लगे कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
भोपाल मंडल द्वारा सम्मानित किए गए कर्मचारियों में इंजीनियरिंग, परिचालन और लोको रनिंग स्टाफ से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए असामान्य परिस्थितियों की पहचान की और समय रहते आवश्यक सूचना देकर संभावित जोखिम को कम किया।
ट्रैक और प्वाइंट सिस्टम की गहरी समझ का मिला सम्मान
सम्मानित कर्मचारियों में ट्रैक मेंटेनर सुमेन्द्र मीना ने रेलवे ट्रैक और प्वाइंट संचालन से जुड़े नियमों की उत्कृष्ट जानकारी और कार्यकुशलता का परिचय दिया। रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार प्वाइंट सिस्टम रेल परिचालन का अत्यंत संवेदनशील हिस्सा होता है, जहां छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
उनकी तकनीकी दक्षता और सुरक्षा नियमों की गहरी समझ को देखते हुए उन्हें संरक्षा अवार्ड से सम्मानित किया गया।
मालगाड़ी संचालन के दौरान उजागर हुई तकनीकी खामियां
रेल परिचालन के दौरान मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों की निगरानी में लगे कर्मचारियों ने भी उल्लेखनीय सतर्कता दिखाई।
वरिष्ठ गुड्स ट्रेन मैनेजर सतीश बकोरिया ने एक एक्सप्रेस ट्रेन में असामान्य स्थिति को पहचानकर तत्काल सूचना दी। जांच में संबंधित डिब्बे में ब्रेक सिस्टम से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। समय पर सूचना मिलने से आवश्यक कार्रवाई की जा सकी और संभावित जोखिम टल गया।
इसी प्रकार वरिष्ठ गुड्स ट्रेन मैनेजर आशीष पराशर ने मालगाड़ी के एक वैगन में सस्पेंशन कॉइल स्प्रिंग की कमी को पहचाना। सूचना मिलने के बाद संबंधित वैगन को अलग कर तकनीकी परीक्षण किया गया, जिससे आगे की यात्रा सुरक्षित बनाई जा सकी।
लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की सतर्कता बनी सुरक्षा कवच
रेलवे में लोको पायलट को ट्रेन का वास्तविक संचालक माना जाता है। नर्मदापुरम और बुधनी रेलखंड के बीच एक असामान्य ट्रैक स्थिति को समय रहते पहचानने वाले लोको पायलट विनोद तिवारी और वरिष्ठ सहायक लोको पायलट यशपाल साहू की भूमिका भी सराहनीय रही।
दोनों कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति का आकलन कर ट्रेन की गति नियंत्रित की और संबंधित विभागों को सूचना देकर आवश्यक सुरक्षा कार्रवाई सुनिश्चित की। उनकी त्वरित प्रतिक्रिया से रेल परिचालन सुरक्षित बना रहा और संभावित दुर्घटना की आशंका टल गई।
रेलवे सुरक्षा में मानवीय सतर्कता की अहम भूमिका
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन के बावजूद रेल सुरक्षा में मानवीय सतर्कता की भूमिका आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रैक निरीक्षण से लेकर ट्रेन संचालन तक हर स्तर पर कर्मचारियों की सजगता यात्रियों और माल परिवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
भोपाल मंडल में दिए गए ये संरक्षा पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि रेलवे की उस कार्य संस्कृति का प्रतीक हैं जिसमें सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
डीआरएम ने कर्मचारियों का बढ़ाया उत्साह
सम्मान समारोह के दौरान डीआरएम पंकज त्यागी ने कहा कि सुरक्षित रेल संचालन की नींव कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा, तकनीकी दक्षता और सतर्कता पर टिकी होती है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से भविष्य में भी इसी प्रकार सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य करने का आह्वान किया।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि ऐसे सम्मान न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे संगठन में सुरक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश भी देते हैं। यही कारण है कि रेलवे नियमित रूप से उत्कृष्ट सुरक्षा कार्य करने वाले कर्मचारियों को पहचान और प्रोत्साहन प्रदान करता है।



