राज्य स्तरीय पुरस्कार के 18 दिन बाद शिक्षिका का तबादला, रिटायरमेंट से पांच महीने पहले नई पदस्थापना पर विवाद

सीधी में अजीता द्विवेदी ने विभागीय कार्रवाई पर उठाए सवाल, हाईकोर्ट के पुराने आदेश और अन्य शिक्षकों की अटैचमेंट व्यवस्था की जांच की मांग
भोपाल। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षिका अजीता द्विवेदी की पदस्थापना को लेकर सीधी के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षिका का आरोप है कि छात्राओं के साथ कथित गलत व्यवहार का विरोध करने के बाद उन्हें शिकायतों और विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ा। अब सेवानिवृत्ति में करीब पांच महीने शेष रहने पर उन्हें संदीपनी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से कार्यमुक्त कर दूसरे विद्यालय में भेज दिया गया है। इस फैसले को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। मामला संदीपनी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीधी का है। अजीता द्विवेदी योग और स्काउट की वरिष्ठ शिक्षिका हैं। उनके अनुसार, वह करीब सात वर्षों से न्यायालय के आदेश के बाद इस विद्यालय में सेवाएं दे रही थीं। उनका दावा है कि पूर्व में पदस्थापना से संबंधित आदेश को हाईकोर्ट ने 2019 में निरस्त कर दिया था। ऐसे में दोबारा दूसरी जगह भेजे जाने के आधार पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
पुरस्कार आदेश के 18 दिन बाद कार्यमुक्त
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अजीता द्विवेदी को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार का आदेश 13 जुलाई 2026 को मिला था। इसके 18 दिन बाद, 31 जुलाई को उन्हें संदीपनी विद्यालय से कार्यमुक्त कर करौंदिया में पानी की टंकी के पास स्थित विद्यालय भेज दिया गया। शिक्षिका का कहना है कि विभाग को पदस्थापना बदलने से पहले उनके मामले में पुराने न्यायालयीन आदेश और सेवानिवृत्ति की निकटता पर विचार करना चाहिए था।
स्काउट गतिविधियों पर असर की आशंका
शिक्षिका के मुताबिक, स्काउट और योग गतिविधियों के लिए उनका पंजीयन संदीपनी विद्यालय से जुड़ा है। उनका दावा है कि वहां स्काउट की दूसरी महिला शिक्षिका भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके स्थान परिवर्तन से छात्राओं की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने लोकेशन रिकॉर्ड और मेडिकल दस्तावेजों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायत भी की है।
अन्य शिक्षकों की अटैचमेंट व्यवस्था पर सवाल
शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि विभागीय निर्देशों के बावजूद कई शिक्षक गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और अन्य स्थानों पर अटैच हैं, लेकिन कार्रवाई उनके विरुद्ध की गई जो विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रही थीं। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी पवन सिंह और विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण लाल विश्वकर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में मुख्य सवाल यह है कि सेवानिवृत्ति से कुछ महीने पहले पदस्थापना बदलने की प्रशासनिक आवश्यकता क्या थी और क्या निर्णय लेते समय पुराने न्यायालयीन आदेश पर विचार किया गया? शिक्षिका की शिकायतों, पदस्थापना आदेश और अन्य शिक्षकों की अटैचमेंट व्यवस्था की निष्पक्ष जांच जरूरी है। शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई के आधार और आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




