गोहद को ‘गौ-हद धाम’ के रूप में पहचान दिलाने की पहल, 16 अक्टूबर को शिलान्यास

25 अक्टूबर को निकलेगी पहली नगरकोट परिक्रमा यात्रा, ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर जोर
गोहद, 13 अक्टूबर। गोहद की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘ब्रजक्षेत्र गौ-हद धाम जनअभियान’ के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को गौ-हद धाम का शिलान्यास किया जाएगा, जबकि रविवार, 25 अक्टूबर को पहली गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा यात्रा निकाली जाएगी। आयोजकों का उद्देश्य गोहद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना और उसके संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।
कालियाकांत मंदिर परिसर में होगा शिलान्यास
गौ-हद धाम का शिलान्यास समारोह 16 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे श्री कालियाकांत मंदिर परिसर में आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार, दंदरौआ धाम के संत रामदास जी महाराज और खनेता धाम के संत रामभूषण जी महाराज के कर-कमलों से शिलान्यास किया जाएगा। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य और श्री कालियाकांत मंदिर के मुख्य पुजारी वीरेंद्र भटेले को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
25 अक्टूबर को निकलेगी नगरकोट परिक्रमा
अभियान के तहत 25 अक्टूबर को सुबह 10 बजे श्री हठीले हनुमान जी मंदिर से प्रथम गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा यात्रा शुरू होगी। यात्रा का समापन गोहद के किला परिसर मैदान स्थित श्री भीमाशंकर महादेव मंदिर पर होगा। आयोजकों ने संत समाज, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, युवाओं और नगरवासियों से यात्रा में शामिल होने की अपील की है।
विरासत संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य
अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, गोहद के ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक स्थलों, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों का व्यवस्थित अध्ययन और दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत के महत्व को पहुंचाना है।अभियान के आयोजकों का मानना है कि यदि गोहद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा का योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण और प्रचार किया जाए, तो धार्मिक एवं विरासत पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
श्रीकृष्ण गमन पथ से संबंध पर भी जोर
अभियान के माध्यम से गोहद को ‘गौ-हद धाम’ के रूप में सांस्कृतिक पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। साथ ही, श्रीकृष्ण गमन पथ के साथ गोहद के संभावित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के अध्ययन तथा इस मार्ग में गोहद को उचित स्थान दिलाने की मांग को भी चर्चा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र की विरासत को सामने लाना और उसके संरक्षण के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।




