भोपाल नगर निगम में 638 कर्मचारियों की पदोन्नति अटकी, सीआर सत्यापन बना बड़ी बाधा

भोपाल, 13 जुलाई। भोपाल नगर निगम में वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लगा है। कर्मचारियों का आरोप है कि गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) के सत्यापन की नई प्रक्रिया के कारण पदोन्नति (डीपीसी) फिलहाल अटक गई है। इससे करीब 638 कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर निगम मुख्यालय में पिछले कई दिनों से बैठकें चल रही हैं। कर्मचारियों से सेवा अवधि की सीआर प्रस्तुत करने को कहा गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले एक सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर वाली सीआर स्वीकार की जाती थी, लेकिन अब ऐसे अधिकारियों के हस्ताक्षर भी मांगे जा रहे हैं जो संबंधित अवधि में पदस्थ थे। कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनका स्थानांतरण हो चुका है, जिससे निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी करना कर्मचारियों के लिए कठिन हो गया है।

डीपीसी नहीं होने से बढ़ी चिंता

कर्मचारियों का कहना है कि पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) का गठन पहले से है, लेकिन अब तक बैठक कर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप है कि सीआर सत्यापन की प्रक्रिया के कारण पदोन्नति में अनावश्यक विलंब हो रहा है।

उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति की मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नगर निगम के पास कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, गोपनीय चरित्रावली (सीआर), विभागीय कार्रवाई और अन्य अभिलेख उपलब्ध हैं। ऐसे में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जा सकती है और यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो तो उसका परीक्षण अलग से किया जा सकता है।

सीआर क्यों महत्वपूर्ण है?

नगर निगम में कर्मचारियों के वार्षिक मूल्यांकन के लिए गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) का उपयोग किया जाता है। इसमें कर्मचारी के कार्य निष्पादन, कार्यकुशलता, आचरण, ईमानदारी, अनुशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। यही रिकॉर्ड पदोन्नति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जाता है।

कर्मचारी संगठन ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के उपाध्यक्ष अशोक वर्मा ने कहा कि निगम प्रशासन को सीआर सत्यापन के लिए एक अधिकृत अधिकारी नियुक्त करना चाहिए। वर्षों पुराने अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनका स्थानांतरण हो चुका है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सेवा अभिलेखों के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

पक्ष जानने का प्रयास: इस संबंध में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।

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