भोपाल। एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित सागर निवासी एक माह के 1.4 किलोग्राम वजन वाले शिशु का सफल ट्रांसकैथेटर पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (पीडीए) डिवाइस क्लोजर कर नई उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के अनुसार यह मध्य प्रदेश और मध्य भारत का सबसे कम वजन वाला शिशु है, जिसका यह जटिल हृदय उपचार सफलतापूर्वक किया गया।
यह प्रक्रिया इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह के नेतृत्व में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुदेश प्रजापति, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंबर कुमार तथा वरिष्ठ एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से सामान्य एनेस्थीसिया के तहत की गई। पूरी प्रक्रिया महज 35 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी हुई। उपचार के बाद शिशु को कैथेटराइजेशन लैब में ही वेंटिलेटर से हटा दिया गया और कुछ ही समय बाद उसने सामान्य रूप से स्तनपान शुरू कर दिया।
क्या है पीडीए?
पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (पीडीए) एक जन्मजात हृदय रोग है, जिसमें जन्म के बाद स्वतः बंद होने वाली रक्त वाहिका खुली रह जाती है। इससे फेफड़ों में अधिक रक्त प्रवाह होने लगता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर शिशु को तेज सांस चलना, दूध पीने में कठिनाई, वजन न बढ़ना, बार-बार संक्रमण और हृदय विफलता जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
1.4 किलोग्राम के शिशु में प्रक्रिया थी बेहद चुनौतीपूर्ण
एम्स भोपाल के अनुसार केवल 1.4 किलोग्राम वजन वाले शिशु में यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल थी, क्योंकि उसकी रक्त वाहिकाएं बेहद छोटी और नाजुक थीं। उन्नत इमेजिंग तकनीक, विशेष उपकरणों और कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी तथा एनेस्थीसिया विभागों के समन्वित प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी।
प्रक्रिया का नेतृत्व करने वाले डॉ. भूषण शाह ने बताया कि शिशु को सांस लेने और दूध पीने में गंभीर परेशानी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है और वर्तमान में कई जन्मजात हृदय रोगों का सफल इलाज संभव है।
कई अस्पतालों ने इलाज से किया था इनकार
शिशु के परिजनों ने बताया कि उन्होंने कई अस्पतालों में उपचार का प्रयास किया, लेकिन कम वजन और अधिक जोखिम का हवाला देकर इलाज से मना कर दिया गया। उन्होंने एम्स भोपाल के चिकित्सकों और पूरी चिकित्सा टीम का सफल उपचार के लिए आभार व्यक्त किया।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने इस उपलब्धि पर कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान की उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल अत्यंत कम वजन वाले नवजात शिशुओं से लेकर वयस्क मरीजों तक जटिल हृदय रोगों का आधुनिक उपचार उपलब्ध करा रहा है।
