नई दिल्ली, 13 जुलाई। दिल्ली हाट में आयोजित चौथे मेघालय पाइनएप्पल फेस्टिवल का समापन रिकॉर्ड उपलब्धियों के साथ हुआ। तीन दिवसीय महोत्सव में 30 मीट्रिक टन ताजे मेघालय अनानास की रिकॉर्ड बिक्री हुई, जो वर्ष 2025 में हुई 15.4 मीट्रिक टन बिक्री का लगभग दोगुना है। वर्ष 2023 में पहले संस्करण के दौरान यह आंकड़ा 7.7 मीट्रिक टन था।
मेघालय सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने राज्य के प्रीमियम अनानास को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। राज्य सरकार के अनुसार अनानास की प्राकृतिक मिठास, कम अम्लता और बेहतर गुणवत्ता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने महोत्सव की सफलता पर दिल्लीवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री मेघालय ग्रासरूट्स म्यूजिक प्रोग्राम (CM-MGMP) के युवा कलाकारों के साथ प्रस्तुति भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसान, उद्यमी और कलाकारों के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन बड़ी सफलता बना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि CM-MGMP से राज्य के 7,000 से अधिक कलाकार जुड़े हैं और अब तक 38,000 से ज्यादा प्रस्तुतियां आयोजित की जा चुकी हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कलाकारों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना और मेघालय की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।
महोत्सव के दौरान ‘मेघालय्स फाइनेस्ट’ ब्रांड के तहत प्रदर्शित अधिकांश उत्पाद पूरी तरह बिक गए। अनानास के अलावा लकाडोंग हल्दी, अदरक, शहद, कटहल चिप्स और अन्य स्थानीय उत्पादों को भी उपभोक्ताओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
आयोजन के दौरान फ्लिपकार्ट और एनसीडीईएक्स ई-मार्केट्स लिमिटेड (NeML) के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किए गए। इन साझेदारियों से मेघालय के अनानास सहित अन्य कृषि उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है, जिससे किसानों को वर्षभर बेहतर विपणन के अवसर मिल सकेंगे।
तीन दिनों तक चले महोत्सव में हजारों लोगों ने मेघालय के ताजे अनानास और मूल्यवर्धित उत्पादों का स्वाद लिया। ‘मीट द ग्रोअर्स’ सत्रों के माध्यम से उपभोक्ताओं ने किसानों से सीधे संवाद किया, जबकि स्थानीय कलाकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों ने मेघालय की संस्कृति और उत्पादों का प्रदर्शन किया।
मेघालय सरकार का कहना है कि यह महोत्सव केवल कृषि उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को संगठित रिटेल, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, निर्यातकों और बड़े खरीदारों से जोड़ने का प्रभावी मंच बन चुका है। राज्य सरकार मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और बाजार विस्तार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
