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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार, 2600 यात्रियों के साथ दौड़ेगी; धुआं नहीं, सिर्फ पानी की भाप निकलेगी

भोपाल। भारतीय रेलवे जल्द ही देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू करने जा रहा है। यह ट्रेन हाइड्रोजन से खुद बिजली बनाकर चलेगी और इससे लगभग शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा। खास बात यह है कि ट्रेन से धुआं नहीं निकलेगा, बल्कि केवल जलवाष्प (पानी की भाप) उत्सर्जित होगी।

2600 यात्रियों की क्षमता वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन

भारतीय रेलवे की यह ट्रेन 10 कोच की होगी, जिसमें एक बार में करीब 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे। दुनिया में अभी अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनें केवल 2 से 4 कोच की हैं, ऐसे में भारत की यह परियोजना काफी बड़ी मानी जा रही है।

कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?

इस ट्रेन में हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होती है। इसी बिजली से ट्रेन के मोटर चलते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में न धुआं निकलता है और न ही कार्बन उत्सर्जन होता है। केवल पानी की भाप और थोड़ी गर्मी पैदा होती है।

सुरक्षा के लिए लगाए गए आधुनिक सिस्टम

हाइड्रोजन ज्वलनशील गैस है, इसलिए रेलवे ने ट्रेन में कई आधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इसमें हाइड्रोजन रिसाव, आग, धुआं और अधिक तापमान का पता लगाने वाले सेंसर लगाए गए हैं। किसी भी खतरे की स्थिति में सिस्टम अपने आप हाइड्रोजन की सप्लाई बंद कर देगा।

हरियाणा के जिंद से होगी शुरुआत

यह ट्रेन सबसे पहले हरियाणा के जिंद-सोनीपत रेलखंड पर चलाई जाएगी। इसकी परिचालन गति 75 किमी प्रति घंटा और अधिकतम डिजाइन गति 110 किमी प्रति घंटा होगी। जिंद में भारत का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी बनाया गया है।

स्वदेशी तकनीक से तैयार हुई ट्रेन

इस ट्रेन का विकास भारतीय रेलवे के नेतृत्व में किया गया है। रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने तकनीकी डिजाइन तैयार किया, जबकि ट्रेन का एकीकरण मेधा सर्वो ड्राइव्स ने किया। ट्रेन के कोच इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने तैयार किए हैं।

भारत बनेगा ग्रीन रेलवे की मिसाल

भारतीय रेलवे का मानना है कि यह परियोजना देश में स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम है। भविष्य में कालका-शिमला जैसे हेरिटेज रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना है। यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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