एमपी नगर सहित कई क्षेत्रों में नगर निगम की कार्रवाई, दो दर्जन से अधिक संस्थानों को नोटिस की तैयारी
भोपाल। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद राजधानी भोपाल में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच अभियान शुरू कर दिया है। मंगलवार को नगर निगम के फायर शाखा के दल ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम नहीं पाए गए।
नगर निगम फायर शाखा ने जांच के लिए चार दल गठित किए थे, जिन्होंने एमपी नगर जोन-1, एमपी नगर जोन-2, इंद्रपुरी, बैरागढ़ और जवाहर चौक क्षेत्र में कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया।
कई कोचिंग सेंटरों में नहीं मिले सुरक्षा मानक
निरीक्षण के दौरान कुछ बड़े कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन पाया गया, लेकिन अधिकांश कोचिंग सेंटरों में छात्रों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी इंतजामों की कमी सामने आई।
जांच में कई स्थानों पर—
पर्याप्त आपातकालीन निकासी मार्ग नहीं मिले।
एक ही प्रवेश और निकास द्वार पाए गए।
वेंटिलेशन व्यवस्था कमजोर मिली।
अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता और स्थिति संतोषजनक नहीं मिली।
नगर निगम ऐसे संस्थानों को नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। वहीं गंभीर कमियां मिलने वाले कोचिंग सेंटरों पर सीलिंग जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
नगर निगम फायर अधिकारी सौरभ पटेल ने बताया कि शहर में समय-समय पर फायर सेफ्टी जांच अभियान चलाया जाता है। वर्तमान में कोचिंग संस्थानों पर विशेष जांच की जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच में दो दर्जन से अधिक ऐसे कोचिंग सेंटर सामने आए हैं, जहां छात्रों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले हैं।
फायर सेफ्टी नियमों में क्या हैं प्रावधान
मध्यप्रदेश में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, बहुमंजिला इमारतों, होटल, कोचिंग सेंटर और सार्वजनिक भवनों के लिए अग्नि सुरक्षा नियम निर्धारित हैं।
इनके तहत—
भवनों में पर्याप्त वेंटिलेशन होना जरूरी है।
आपातकालीन निकासी मार्ग उपलब्ध होना चाहिए।
मानक के अनुरूप अग्निशामक उपकरण लगाए जाने चाहिए।
15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) आवश्यक है।
बिना फायर सेफ्टी के कैसे मिल रही संचालन की अनुमति?
राजधानी में एमपी नगर सहित कई क्षेत्रों में वर्षों से कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिन भवनों में कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, उन्हें संचालन की अनुमति देते समय सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं की गई।
कोचिंग संचालकों के लिए भवन उपयोग, अग्नि सुरक्षा और अन्य मानकों का पालन आवश्यक है। लेकिन लंबे समय से संचालित कई संस्थानों में अब भी सुरक्षा व्यवस्था अधूरी होने की शिकायत सामने आ रही है।
हजारों छात्रों की सुरक्षा पर सवाल
भोपाल में प्रदेश के अलग-अलग जिलों और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में करीब 50 हजार से अधिक छात्रों के अध्ययन करने का अनुमान है।
ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में कमी विद्यार्थियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हादसों के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
शहर में अक्सर बड़े हादसों के बाद ही सुरक्षा जांच अभियान तेज होने पर सवाल उठते रहे हैं। चाहे भवन निर्माण, अस्पताल, कोचिंग सेंटर या अन्य व्यावसायिक संस्थान हों, नियमों के पालन की नियमित निगरानी की आवश्यकता रहती है।
प्रशासन द्वारा अभियान शुरू किए जाने के बाद कुछ समय तक जांच होती है, लेकिन लगातार निगरानी नहीं होने से स्थिति फिर पहले जैसी होने की शिकायतें सामने आती हैं।
पिछले साल भी दिए गए थे नोटिस
नगर निगम द्वारा पिछले वर्ष भी कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर जांच अभियान चलाया गया था और कई संस्थानों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि इसके बाद कई संस्थानों ने कमियों को दूर किया या नहीं, इसकी नियमित निगरानी नहीं हो सकी।
अब लखनऊ हादसे के बाद एक बार फिर जांच शुरू हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कितने कोचिंग संस्थान सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं और कितनों पर कार्रवाई की जाती है।