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85 वर्षीय बुजुर्ग का नेत्रदान, एम्स भोपाल के कॉर्नियल रिट्रीवल प्रोग्राम से जरूरतमंदों को मिलेगी नई रोशनी

भोपाल। मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला फैलाने की भावना को आगे बढ़ाते हुए एम्स भोपाल में एक 85 वर्षीय व्यक्ति का सफल नेत्रदान किया गया। यह पहल न केवल अंग एवं ऊतक दान के महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी देती है।

एम्स भोपाल के कॉर्नियल रिट्रीवल प्रोग्राम के अंतर्गत यह नेत्रदान संस्थान के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

परिवार ने दुख की घड़ी में लिया प्रेरणादायक निर्णय

बिहार के बक्सर जिले के नवानगर निवासी 85 वर्षीय स्वर्गीय राजकिशोर प्रसाद के निधन के बाद उनके पुत्र ने परिवार की सहमति से नेत्रदान का निर्णय लिया।

शोक की स्थिति में लिया गया यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बना। परिवार की सहमति के बाद एम्स भोपाल की नेत्र बैंक एवं नेत्र रोग विभाग की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की।

कॉर्नियल दृष्टिहीनता से पीड़ित मरीजों को मिलेगी उम्मीद

नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया उन मरीजों के लिए उपयोगी होता है, जो कॉर्नियल दृष्टिहीनता के कारण देखने में असमर्थ होते हैं। ऐसे मरीजों के लिए सफल प्रत्यारोपण जीवन में फिर से प्रकाश ला सकता है।

एम्स भोपाल के नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष ने कहा कि नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के महत्व को समझें और मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी पहुंचाने का संकल्प लें।

बेहतर समन्वय से पूरी हुई प्रक्रिया

नेत्र बैंक और नेत्र रोग विभाग की टीम ने परिवार से संपर्क कर उन्हें नेत्रदान की प्रक्रिया, महत्व और आवश्यक औपचारिकताओं के बारे में जानकारी दी।

इस पूरी प्रक्रिया में मेडिकल आईसीयू (MICU) की नर्सिंग एवं चिकित्सक टीम, नेत्र बैंक टीम और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रो. (डॉ.) भावना शर्मा ने सभी टीम सदस्यों के समन्वय और समय पर किए गए प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

भारत में कॉर्नियल दृष्टिहीनता से पीड़ित अनेक मरीजों के लिए नेत्रदान एक महत्वपूर्ण विकल्प है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार समय पर नेत्रदान की जानकारी मिलने और प्रशिक्षित टीम द्वारा प्रक्रिया पूरी करने से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।

एम्स भोपाल ने राजकिशोर प्रसाद के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके इस निर्णय के लिए आभार जताया और आम नागरिकों से अपील की कि वे नेत्रदान के संदेश को आगे बढ़ाएं।

एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में दृष्टि लौटाने की संभावना पैदा कर सकता है और समाज में मानवता की नई मिसाल कायम कर सकता है।

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