भोपाल। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला भारतीय कालगणना और खगोल विज्ञान के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रही है। यहां आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और विज्ञान प्रदर्शनी में विशेषज्ञों ने प्राचीन भारतीय खगोलीय ज्ञान, कालगणना परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संबंधों पर प्रकाश डाला।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट), भोपाल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 300 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं, प्राचार्यों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों ने भाग लिया।
प्राचीन कालगणना का केंद्र रहा है डोंगला क्षेत्र
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि डोंगला का भौगोलिक क्षेत्र सदियों से कालगणना और समय निर्धारण की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। भारतीय वैदिक और खगोलीय ग्रंथों में इसके प्रमाण मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए आगे आना चाहिए। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में विज्ञान और तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है।
डॉ. कोठारी ने डोंगला वेधशाला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों और प्रयासों का भी उल्लेख किया।
विज्ञान प्रदर्शनी में बच्चों ने जाना खगोल विज्ञान
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बच्चों के लिए विशेष चलित विज्ञान प्रदर्शनी लगाई। उन्होंने डोंगला की भौगोलिक स्थिति और खगोलीय महत्व को सरल तरीके से समझाया।
उन्होंने क्विज के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद किया और खगोल विज्ञान से जुड़ी उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
विशेषज्ञों ने दिए वैज्ञानिक और अकादमिक व्याख्यान
कार्यशाला के तकनीकी और अकादमिक सत्रों में विभिन्न विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इस दौरान:
– आईआईटी इंदौर के रिसोर्स पर्सन डॉ. एन. पात्रा,
– महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के अकादमिक निदेशक एवं विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद डॉ. रमन सोलंकी,
– डोंगला वेधशाला के खगोलविद एवं वैज्ञानिक अधिकारी घनश्याम रतनानी
ने खगोल विज्ञान, भारतीय कालगणना और वैज्ञानिक अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
उत्कृष्ट विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम को सफल बनाने में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त परियोजना संचालक डॉ. मनोज कुमार राठौर, डॉ. सुनील गर्ग और डॉ. भूपेश सक्सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर खगोलीय गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए।