बैरसिया में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मिले संभागायुक्त, आजीविका योजनाओं की प्रगति का लिया जायजा

भोपाल, 11 जून। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से भोपाल संभाग के आयुक्त संजीव सिंह ने बैरसिया जनपद पंचायत का दौरा कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों, महिला उद्यमिता और स्वरोजगार कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी प्राप्त की।
महिलाओं के उत्पादों और उद्यमों में दिखाई आत्मनिर्भरता की झलक
दौरे के दौरान संभागायुक्त ने विभिन्न स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से उनके कार्यों, उत्पादन प्रक्रियाओं और विपणन संबंधी अनुभवों पर चर्चा की। महिलाओं ने जैविक उत्पादों, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, जरी-जरदोजी, पशुपालन और कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से अपने आर्थिक सशक्तिकरण की जानकारी साझा की।
उन्होंने समूहों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और स्व-सहायता समूह इस परिवर्तन के प्रमुख माध्यम बनकर उभरे हैं।
आजीविका मिशन के तहत मिल रही आर्थिक सहायता
संभागायुक्त ने बताया कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से समूहों को प्रारंभिक स्तर पर 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की परिक्रामी निधि उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त समूहों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए 2.50 लाख रुपये तक की सामुदायिक निवेश सहायता भी प्रदान की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में जिले के स्व-सहायता समूहों के लिए लगभग 68 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है, जिससे महिला उद्यमों को नई गति मिली है।
51 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ीं आर्थिक सशक्तिकरण से
जिला पंचायत के आंकड़ों के अनुसार भोपाल जिले में वर्तमान में 4,051 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 51 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये समूह न केवल महिलाओं को बचत और ऋण की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर भी प्रदान कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह मॉडल प्रभावी साबित हो रहा है।
प्रशिक्षण से रोजगार तक का सफर
स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। जिले के जरी-जरदोजी प्रशिक्षण केंद्र में 350 से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, जहां उन्हें प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
इसके अलावा कई महिलाएं जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी गतिविधियों, पशुपालन और हस्तशिल्प उत्पाद निर्माण के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
ग्रामीण विकास में महिला समूहों की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूह केवल वित्तीय सहायता का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने का भी सशक्त मंच बन चुके हैं। बैरसिया में आयोजित यह संवाद कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब महिला समूहों को ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है।
जिले में हजारों महिलाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि संगठित प्रयासों और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।



