
अखंड रामायण पाठ और विशाल भंडारे में अधिकारी-कर्मचारी से लेकर विभिन्न वर्गों के लोगों ने की सहभागिता
भोपाल। मध्यप्रदेश मंत्रालय के इतिहास में कर्मचारी एकजुटता और सम्मान का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रवक्ता राजकुमार पटेल की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित अखंड रामायण पाठ और विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए।
मंत्रालय वल्लभ भवन के गेट क्रमांक-6 के समीप स्थित गणेश मंदिर में आयोजित इस धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन में मंत्रालय से जुड़े लगभग सभी वर्गों की सहभागिता रही। कार्यक्रम को लेकर कर्मचारी जगत में विशेष चर्चा रही और इसे श्री पटेल के लंबे सार्वजनिक जीवन एवं कर्मचारी हितों के लिए किए गए कार्यों के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया।
40 वर्षों की सेवा के बाद विदाई
राजकुमार पटेल 30 जून को अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर लगभग 40 वर्षों की सुदीर्घ शासकीय सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। वे मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रवक्ता के रूप में लंबे समय से कर्मचारी हितों की आवाज उठाते रहे हैं।
उनके सहयोगियों के अनुसार, श्री पटेल एक ईमानदार, संघर्षशील और समर्पित कर्मचारी नेता के साथ-साथ कर्तव्यनिष्ठ शासकीय सेवक भी रहे हैं। उत्कृष्ट शासकीय सेवाओं के लिए उन्हें मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदान किया जाने वाला देवीप्रसाद शर्मा पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।
कर्मचारी संगठनों में बनाई अलग पहचान
राजकुमार पटेल ने कर्मचारी संगठनों में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। वे लघुवेतन कर्मचारी संघ के उपप्रांताध्यक्ष भी रह चुके हैं। मंत्रालय कर्मचारी संगठन के चुनावों में लगातार 13 बार निर्वाचित होकर उन्होंने संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
वे मंत्रालय साख सहकारी समिति के निर्वाचित अध्यक्ष भी रहे, जिसका वार्षिक कारोबार लगभग 35 करोड़ रुपए बताया जाता है। कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और हितों से जुड़े कई मामलों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
कर्मचारियों के हितों के लिए किए कई प्रयास
सहकर्मियों के अनुसार, मंत्रालय कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनी के लिए ग्राम कानासैया में 40 एकड़ भूमि आवंटन की प्रक्रिया में श्री पटेल के प्रयास महत्वपूर्ण रहे। वहीं साख सहकारी समिति के सदस्यों की अटकी हुई जमाराशि वापस दिलाने के प्रयासों में भी उन्होंने भूमिका निभाई।
कोरोना काल के दौरान भी श्री पटेल ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए भोपाल में फंसे जरूरतमंद परिवारों के लिए जनसहयोग से भोजन व्यवस्था कराई। विंध्य क्षेत्र के लोगों की घर वापसी के लिए रेवांचल ट्रेन संचालन से जुड़े प्रयासों में भी उनके योगदान का उल्लेख किया जाता है।
भीमनगर-वल्लभ नगर क्षेत्र में सामाजिक सक्रियता
कर्मचारी राजनीति के अलावा श्री पटेल भोपाल की बड़ी झुग्गी बस्ती भीमनगर-वल्लभ नगर क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर भी सक्रिय रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए।
इसके अलावा विंध्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं और कुर्मी क्षत्रिय समाज की सामाजिक संस्थाओं में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
अखंड रामायण पाठ के बाद हुआ विशाल भंडारा
श्री पटेल की सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में 14 जून से अखंड रामायण पाठ शुरू हुआ, जिसकी पूर्णाहुति 15 जून को दोपहर 12 बजे हुई। इसके बाद हनुमान जी महाराज को भोग अर्पित कर विशाल झरा भंडारे का आयोजन किया गया, जो शाम तक चलता रहा।
इस भंडारे में मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ विभिन्न सेवाओं से जुड़े लोगों ने भाग लिया। इनमें नियमित कर्मचारी, अनियमित कर्मचारी, स्थायी-अस्थायी कर्मचारी, मंत्री स्टाफ, आउटसोर्स कर्मचारी, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, पुलिसकर्मी, बैंककर्मी, कैंटीन कर्मचारी, सांची पार्लर कर्मचारी, पोस्ट ऑफिस कर्मी, विद्युत एवं जल व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी, लिफ्ट और एसी संचालन कर्मचारी, उद्यान एवं सफाई कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
इंदिरा मार्केट के व्यापारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर श्री पटेल को शुभकामनाएं दीं।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने भी दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने श्री राजकुमार पटेल को सुखद एवं स्वस्थ भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी भंडारे में शामिल हुए और उन्होंने श्री पटेल को बधाई दी।
इसके अलावा विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी, जिनमें मनोज वाजपेयी, श्यामसुंदर शर्मा और नरेंद्र सिंह राजपूत सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।
कर्मचारी जगत में चर्चा का विषय बना आयोजन
श्री राजकुमार पटेल की विदाई का यह आयोजन केवल एक सेवानिवृत्ति कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि लंबे समय तक कर्मचारियों के बीच विश्वास, सहयोग और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। मंत्रालय से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी कर्मचारी नेता की सेवानिवृत्ति पर इस स्तर की व्यापक भागीदारी संगठनात्मक संबंधों और वर्षों की सेवा के प्रति सम्मान को दर्शाती है।





