महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल के शौर्य को काव्य में किया नमन, भोपाल में साहित्यकारों का सम्मान समारोह

भोपाल। वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा की परंपरा को साहित्य के माध्यम से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में महाराणा प्रताप एवं महाराजा छत्रसाल जयंती के अवसर पर वीर रस काव्य गोष्ठी और साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
अखिल भारतीय कला मंदिर संस्था, भोपाल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर वक्ताओं और कवियों ने अपने विचार रखे। साथ ही मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत साहित्य अकादमी द्वारा सम्मान के लिए चयनित भोपाल के साहित्यकारों का अभिनंदन किया गया।
साहित्य को राष्ट्र चेतना से जोड़ने का आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ने कहा कि साहित्य समाज की चेतना को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे अपने सृजन के माध्यम से राष्ट्रीय भावना, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का कार्य करें। सम्मानित साहित्यकारों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने साहित्यकार पार्क के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
शौर्य और त्याग की परंपरा को किया याद
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि ने महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल के जीवन आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका संघर्ष केवल ऐतिहासिक घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, आत्मसम्मान और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों के जीवन मूल्य समाज को कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रहने की प्रेरणा देते हैं।
साहित्यकार पार्क की विकास योजना पर चर्चा
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्वागत भाषण देते हुए साहित्यकार पार्क भवन निर्माण में मध्यप्रदेश शासन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने साहित्यकार पार्क की आगामी विकास योजनाओं की जानकारी दी और साहित्य अकादमी द्वारा सम्मान के लिए चयनित साहित्यकारों का अभिनंदन किया।
वीर रस की कविताओं से गूंजा मंच
वीर रस काव्य गोष्ठी में कवियों ने महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल के साहस, संघर्ष, मातृभूमि के प्रति समर्पण और स्वाभिमान को केंद्र में रखकर प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।
काव्य पाठ के दौरान उपस्थित श्रोताओं में देशभक्ति और गौरव का भाव देखने को मिला। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इतिहास के प्रेरणादायक प्रसंगों को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया।
साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम में कला मंदिर संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’, उपाध्यक्ष डॉ. प्रभात पाण्डेय, सचिव व्ही.के. श्रीवास्तव सहित संस्था के पदाधिकारी, साहित्यकार, कवि और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन आदित्य हरी गुप्ता ने किया। अंत में संस्था की ओर से सभी अतिथियों, साहित्यकारों और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
यह आयोजन इस बात का उदाहरण रहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों और मूल्यों को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम भी है।





