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दानिश हिल्स जमीन विवाद: सीमांकन रिपोर्ट पर उठे सवाल, रहवासियों ने रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका जताई

भोपाल। दानिश हिल्स और अकबरपुर क्षेत्र में शासकीय जमीन के सीमांकन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रहवासियों का आरोप है कि जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया में अलग-अलग स्तर पर विरोधाभासी स्थिति सामने आई है। उनका कहना है कि शुरुआती सीमांकन में जिस जमीन पर पोकलेन मशीन चल रही थी, उसे शासकीय भूमि बताया गया था, लेकिन बाद में तैयार की गई एक रिपोर्ट में उसी हिस्से को निजी भूमि बताया गया। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर दोबारा सीमांकन कराने की मांग की है।

पहले सीमांकन में शासकीय भूमि सामने आई

रहवासियों के अनुसार, सीमांकन के दौरान आरआई और पटवारी मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने मोबाइल में उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर मौके की स्थिति देखी। इसी दौरान वहां पोकलेन मशीन से काम कराया जा रहा था। अधिकारियों ने मशीन चलाने वाले और ठेकेदार के संबंध में जानकारी ली और उनके नाम पंचनामा में दर्ज किए गए।

रहवासियों का दावा है कि मौके पर तैयार किए गए पंचनामा और जब्ती संबंधी दस्तावेजों में पोकलेन को अकबरपुर की शासकीय भूमि, छोटे झाड़ का जंगल, खसरा नंबर-3 में चलते हुए बताया गया था। पुलिस को सूचना देने के बाद भी मौके पर पुलिस नहीं पहुंची, जिसके बाद मशीन के संबंध में जब्ती की कार्रवाई की गई।

दूसरे निरीक्षण में भी वही स्थिति बताई

इसके बाद संबंधित नायब तहसीलदार ने आरआई के साथ मौके का निरीक्षण किया। रहवासियों का कहना है कि उन्हें भी राजस्व रिकॉर्ड दिखाया गया और मौके की स्थिति देखने के बाद बताया गया कि मेड़ के दूसरी तरफ की जमीन शासकीय भूमि में आती है। इस आधार पर रहवासियों ने इसे दूसरा सीमांकन बताया है।

उनका कहना है कि सीमांकन रिपोर्ट मिलने के बाद शासकीय जमीन को वन विभाग को सौंपने और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती थी। साथ ही अवैध रूप से बनी बाउंड्रीवाल के संबंध में भी कार्रवाई की मांग की गई थी।

पुराना एनजीटी मामला भी सामने आया

रहवासियों के मुताबिक, इस जमीन को लेकर वर्ष 2023 में एनजीटी में भी मामला पहुंच चुका है। उस दौरान कलेक्टर की ओर से सीमांकन कराने और आगे अतिक्रमण नहीं होने देने की बात कही गई थी। रहवासियों का कहना है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड और उस समय तैयार दस्तावेजों को भी मौजूदा जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

दशहरा मैदान की जमीन से भी जुड़ा मामला

इसी बीच अकबरपुर के खसरा नंबर-3 से जुड़े हिस्से में दशहरा मैदान विकसित किए जाने का मामला भी सामने आया। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की टीम ने मौके से संबंधित जमीन की स्थिति की जानकारी ली। रहवासियों के अनुसार, टीम की ड्राइंग पुराने खसरों और सीमांकन रिकॉर्ड से मिलती है तथा उसमें मेड़ के दूसरी तरफ की जमीन खसरा नंबर-3 में दर्शाई गई है।

इस ड्राइंग को नगर निगम में जमा किए जाने की बात भी सामने आई है। रहवासियों का दावा है कि यह प्रक्रिया भी जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट बदलने के आरोप, अधिकारी ने हस्ताक्षर से किया इनकार

रहवासियों का आरोप है कि बाद में एक ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें पोकलेन वाले हिस्से को निजी जमीन और कुछ दुकानों को अलग स्थिति में बताया गया। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारी ने इस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और दोबारा संपूर्ण सीमांकन कराने की बात कही।

रहवासियों ने आशंका जताई है कि पुराने खसरों की स्थिति में बदलाव कर जमीन की सीमा को आगे-पीछे करने का प्रयास किया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे वर्षों पुराने मकानों और वैध निर्माणों पर भी कार्रवाई का खतरा पैदा हो सकता है।

पोकलेन गायब होने पर भी सवाल

मामले में पोकलेन मशीन के गायब होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रहवासियों के अनुसार, मशीन को लेकर पुलिस में शिकायत की गई है, लेकिन कई दिन बाद भी मशीन की बरामदगी नहीं हुई है। उनका कहना है कि पुलिस को सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि मौके पर मशीन किसके कहने पर और किसके काम के लिए चलाई जा रही थी। इसी से मामले की कड़ी आगे जुड़ सकती है।

कलेक्टर ने कार्रवाई के निर्देश दिए

रहवासियों के अनुसार, उन्होंने पूरे मामले की जानकारी कलेक्टर को दस्तावेजों और दशहरा मैदान से संबंधित ड्राइंग के साथ दी है। उनका दावा है कि कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलोनी सेल की जिम्मेदारी एडीएम सुमित पांडे को दी है। शासकीय भूमि के आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया को समयसीमा में पूरा करने के लिए भी व्यवस्था बनाई गई है।

वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल

रहवासियों ने वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन में जमीन शासकीय अथवा वन भूमि के रूप में सामने आती है तो संबंधित विभाग को मौके पर सक्रिय होकर अपनी जमीन की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। उनका आरोप है कि अभी तक वन विभाग की ओर से अपेक्षित पहल दिखाई नहीं दे रही है।

निष्पक्ष जांच की मांग

रहवासियों ने पूरे मामले में किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना आरोप लगाया है कि स्थानीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया प्रभावित किए जाने की आशंका है। उनका कहना है कि अलग-अलग अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण, पुराने खसरे, नक्शे, पंचनामा, जब्ती दस्तावेज और नई रिपोर्ट का स्वतंत्र रूप से मिलान कराया जाए। साथ ही पोकलेन मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि मशीन किसके निर्देश पर चलाई गई थी।

रहवासियों का कहना है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाकर पारदर्शी सीमांकन ही इस विवाद का स्थायी समाधान हो सकता है।

इनका कहना है

हमारे पास दानिश हिल्स पहाड़ी को काटकर बिल्डर द्वारा अवैध निर्माण से संबंधी सीमांकन को लेकर शिकायत आ है, उसके आधार पर हम जांच कर आगे को कार्यवाही की जाएगी,

सुमित कुमार पांडे, एडीएम , प्रभारी कालोनी सेल

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