एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के चिन्हांकन की मौके पर जांच, खानूगांव सहित कई जगह मुनारे मिली गायब
भोपाल, 6 सितंबर। राजधानी में रविवार को एनजीटी द्वारा गठित टीम ने भोजताल और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वे किया। सर्वे की शुरुआत गौहर महल से ड्रोन उड़ाकर की गई। इसके साथ ही दूसरी टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण और ग्राउंड ट्रुथिंग की। ड्रोन सर्वे और जमीनी जांच एक साथ चलती रही।
सर्वे के दौरान भोजताल की सीमा, फुल टैंक लेवल (FTL) और ग्रीन बेल्ट के चिन्हांकन की मौके पर स्थिति देखी गई। टीम को कई स्थानों पर एफटीएल और ग्रीन बेल्ट की मुनारे दिखाई नहीं दीं। वहीं कुछ जगह रिटेनिंग वॉल के ऊपर से तालाब का पानी बहता हुआ मिला।
खानूगांव में कई जगह मुनारे गायब
एनजीटी की टीम ने दूसरे दिन भी भोजताल के सर्वे का काम जारी रखा। खानूगांव क्षेत्र में कई स्थानों पर एफटीएल और ग्रीन बेल्ट की मुनारे गायब मिलीं। कुछ हिस्सों में पानी सामान्य सीमा से काफी आगे तक फैला हुआ नजर आया।
सर्वे में खानूगांव की अंडर-कंस्ट्रक्शन क्रूज साइट, आर्मी स्पोर्ट्स एरिया, ग्राम कोहेफिजा, हलालपुरा स्थित फिजा फार्म, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे का क्षेत्र और चिरायु अस्पताल क्षेत्र को प्रमुखता से कवर किया गया।
फिजा फार्म में पुल के आगे तक पानी
हलालपुरा के फिजा फार्म क्षेत्र में टीम को एक पक्का पुल बना हुआ मिला। निरीक्षण के दौरान पुल के आगे तक पानी फैला हुआ दिखाई दिया। वहीं लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पीछे सड़क के आसपास करीब छह फीट तक भराव नजर आया। आसपास जलभराव की स्थिति भी देखी गई।
टीम ने समीप स्थित मैरिज गार्डन और पार्किंग से जुड़े भराव वाले क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया। इस क्षेत्र में भी एफटीएल की मुनारे मौके पर दिखाई नहीं दीं। ड्रोन से क्षेत्र की तस्वीर और स्थिति देखने के साथ-साथ ग्राउंड ट्रुथिंग कर वास्तविक स्थिति का तकनीकी आकलन किया गया।
बैरागढ़ क्षेत्र का सर्वे अभी बाकी
सर्वे के दौरान जलभराव, तालाब की सीमा, एफटीएल और ग्रीन बेल्ट से जुड़े क्षेत्रों की स्थिति का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सुभाष सी. पांडेय और याचिकाकर्ता राशिद नूर खान भी टीम के साथ मौजूद रहे। निरीक्षण की कार्रवाई करीब दोपहर 3 बजे तक जारी रही।
बैरागढ़ क्षेत्र का सर्वे अभी बाकी है, जिसे आगे पूरा किया जाएगा।
सर्वे के बाद अतिक्रमण की स्थिति होगी स्पष्ट
भोजताल से जुड़े कई क्षेत्रों में एफटीएल, ग्रीन बेल्ट और वास्तविक जलभराव क्षेत्र के स्पष्ट चिन्हांकन का तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है। ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रुथिंग पूरी होने के बाद बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में हुए संभावित अतिक्रमण और भराव की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
