आयुष्मान योजना में अनियमितता के आरोप, कार्रवाई नहीं होने पर एनएसयूआई ने उठाए सवाल

उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य संचालनालय के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप, सीबीआई से एफआईआर की मांग

भोपाल। राजधानी के श्री बालाजी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में आयुष्मान भारत निरामय योजना सहित अन्य शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर एनएसयूआई ने सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि अस्पताल के खिलाफ शिकायतों और शासन स्तर से जांच के निर्देश के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत और चिकित्सा अधिकारी डॉ. अश्विन भंबल द्वारा अस्पतालों के निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनका दावा है कि कथित तौर पर गलत निरीक्षण रिपोर्ट के माध्यम से शासन को गुमराह किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

परमार के अनुसार, एनएसयूआई की शिकायत के बाद 9 मई 2026 को विशेष सहायक, उप मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से आयुक्त को पत्र जारी कर श्री बालाजी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को वरिष्ठ संयुक्त संचालक, विनियमन एवं नीति ने सीएमएचओ भोपाल से अस्पताल की जांच से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

पत्र में अस्पताल के पंजीयन और लाइसेंस की स्थिति, चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ का सत्यापन, उपस्थिति और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड तथा आयुष्मान एवं अन्य शासकीय योजनाओं के तहत किए गए दावों की जांच से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि शासन स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद अस्पताल के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एनएसयूआई ने मामले को लेकर सीबीआई, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा सीईओ आयुष्मान भारत निरामय योजना, मध्यप्रदेश को शिकायत भेजी है। शिकायत में अस्पताल संचालकों और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर, आयुष्मान योजना के दावों और अस्पताल के दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच तथा पूर्व निरीक्षण रिपोर्टों की भी जांच की मांग की गई है।

अक्षय तोमर ने कहा कि यदि आयुष्मान योजना में किसी स्तर पर फर्जीवाड़ा हुआ है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।डेटा/दावा सत्यापन: खबर में अस्पताल के खिलाफ लगाए गए फर्जीवाड़े और अधिकारियों से जुड़े आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि एनएसयूआई के आरोप के रूप में रखा गया है। शासन के पत्रों की मूल प्रतियां उपलब्ध होने पर उनकी तारीख और निर्देशों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जा सकता है।

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