करोड़ों के पुरुषोत्तम, एक करोड़ की योजना के ब्रांड

लेखक : सरयूसूत मिश्रा,
इतिहास में पहली बार किसी राज्य में सरकारी योजना का नामकरण भगवान श्रीकृष्ण के नाम से किया गया है. मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना पर प्रतियोगिता की घोषणा की गई है.
इसमें 102 छात्रों को एक-एक लाख की छात्रवृत्ति दी जाएगी. इस प्रकार योजना में लगभग एक करोड़ दो लाख रुपए का व्यय आएगा. योजना की घोषणा करते हुए समाचार पत्रों में फुल पेज के विज्ञापन प्रकाशित हुए. इन विज्ञापनों पर ही योजना में दी जाने वाली छात्रवृत्ति की कुल राशि से आधी राशि तो खर्च ही होगी.
पूरे देश में मध्य प्रदेश सहित किसी भी राज्य में भगवान राम या भगवान कृष्ण पर कोई भी शासकीय योजना अब तक लागू नहीं की गई है. केवल उनकी जन्मभूमि पर विकास के काम जरूर हुए हैं. केंद्र शासन ने मनरेगा का नाम बदलकर नए नाम का ऐसा संयोजन किया है, जिससे शॉर्ट में जीरामजी योजना संबोधित की जाती है. इस योजना का नाम भी भगवान राम पर नहीं है, योजना के नाम में ऐसे शब्द संयोजित हैं जिससे राम शब्द उद्भूत होता है.
राम जन्मभूमि आंदोलन ने भारत के राजनीतिक इतिहास को बदला है. इसके पक्ष-विपक्ष में राजनीतिक उपयोग का भी लंबा सिलसिला अब तक चल रहा है. इसके बाद भी किसी सरकार में भगवान राम के नाम पर किसी योजना का नामकरण नहीं किया है. राम वन गमन पथ के विकास के लिए मध्य प्रदेश में एक योजना संचालित है. यह योजना भगवान राम द्वारा वनवास मार्ग स्थलों के विकास तक सीमित है. यह उनके धार्मिक सेंटीमेंट से ही जुड़ी हुई है. इसे किसी सरकार की सामान्य योजना के रूप में नहीं देखा जा सकता है.
इसी प्रकार भगवान कृष्ण का भी किसी योजना के नामकरण के लिए अभी तक किसी भी सरकार द्वारा उपयोग नहीं किया गया है. राम और कृष्ण की जन्मभूमि यूपी में है. यूपी सरकार भी उनके नाम का उपयोग उनसे जुड़े धार्मिक क्षेत्र के विकास तक ही सीमित रखती है. सरकार के किसी भी विभाग की योजना से उनके नाम को अब तक नहीं जोड़ा गया है.
मध्य प्रदेश में मोहन सरकार है, तो श्रीकृष्ण से जुड़े प्रतीकों का उपयोग तो शासकीय योजना में किया जाता रहा है. मोहन सरकार ने ही मध्य प्रदेश से जुड़े भगवान श्रीकृष्ण के तीर्थ स्थलों के विकास के लिए कृष्ण पाथेय न्यास बनाया है. गांव के विकास के लिए वृंदावन ग्राम योजना लागू की गई है. महर्षि संदीपनी के नाम पर सीएम एक्सीलेंस स्कूलों का नाम बदला गया है.
किसी योजना में भगवान श्रीकृष्ण का नाम जोड़ना उनकी भक्ति और आस्था करने वालों का अपमान दिखाई पड़ता है. भारतीय संस्कृति में जिन्हें भगवान के रूप में पूजा जाता है उन्हें सरकारी तंत्र अपनी योजनाओं से जोड़कर तंत्र की गड़बड़ियों में उनको भी घसीट रही है. सरकार की योजनाओं में आए दिन करप्शन उजागर होते हैं. अगर इस प्रतियोगिता और छात्रवृत्ति योजना में कोई गड़बड़ी और करप्शन सामने आता है, तो उसमें भगवान श्री कृष्ण का नाम भी जुड़ा रहेगा जो किसी भी तरह से उचित नहीं हो सकता .है
हर सीएम सरकारी योजनाओं से स्वयं को ब्रांड करता है. पुरानी सरकार की योजनाओं को मजबूरी में ही संचालित किया जाता है. मध्य प्रदेश में बीजेपी की मुख्यमंत्री उमा भारती ने पंचज अभियान चालू किया था, उनके लिए हर यात्रा मार्ग पर गाय का प्रबंध किया जाता था. वह गाय को रोटी खिलाती थीं. सीएम बाबूलाल गौर, गोकुल ग्राम योजना लेकर आए. शिवराज सिंह चौहान ने अपने मुख्यमंत्री काल में इन दोनों योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर स्वर्णिम और आओ बनाए मध्य प्रदेश जैसे अभियान चालू किए. शिक्षा में सुधार के लिए सीएम एक्सीलेंस स्कूल स्थापित किया. अब वर्तमान मुख्यमंत्री ने उन सारी योजनाओं को छोड़ दिया. भगवान श्रीकृष्ण सीएम के नाम से भी जुड़ते हैं, उनका गृह नगर उज्जैन कृष्ण की शिक्षास्थली रही है.
भगवान कृष्ण से जुड़े प्रतीकों और तीर्थ स्थानों के विकास पर निश्चित ही उनका ध्यान होगा. जो परिलक्षित भी हो रहा है. भगवान के नाम का उपयोग सरकारी योजना में करना ही अगर गुड गवर्नेंस है, तो फिर यह तो कोई भी सरकार और मुख्यमंत्री कर सकता है. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद जितनी भी योजनाएं लागू हुई हैं, उनमें अधिकांश का नाम पीएम के पद से ही जुड़ा हुआ है. किसी भी योजना का नाम किसी धार्मिक प्रतीक से जुड़ा नहीं है. जिन सरकारी योजनाओं में सभी धर्म के लोगों को लाभ लेने की पात्रता है, उनका नाम किसी एक धर्म के प्रतीक पर जोड़ना वैसे भी अनुचित लगता है.
पूरे सिस्टम को परखने के लिए इसका एक छोटा सा हिस्सा ही काफी होता है. एक ही चावल से पतीले के सब चावलों का पता चल जाता है. मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी की विवेकशीलता पर भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर योजना का नामकरण बड़ा सवाल है. इस योजना में जितने शासकीय विभागों की सहभागिता बताई गई है, वह भी हास्यास्पद है. सरकार एक इकाई है. हर विभाग का कार्य संचालन नियमों में निर्धारित दायित्व है. प्रत्येक विभाग अपना दायित्व निभाते हैं. श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना का आयोजक संस्कृति विभाग घोषित हो गया, यह बात समझ से परे है.
भगवान श्रीकृष्ण को माखन चोर भी पुकारा जाता है. इस पर भी मध्य प्रदेश से ही ऐसे विचार आए थे कि उन्हें माखन चोर कहना अनुचित है, जब इस पर मथुरा वृंदावन के पुरोहितों ने आपत्ति ली तो फिर इस एक्टिविज़्म को छोड़ा गया.
सरकार एक निश्चित सिस्टम है. सीएम आएंगे-जाएंगे लेकिन सिस्टम हमेशा रहेगा. सिस्टम में ऐसा ना हो कि उसके कारण ब्यूरोक्रेसी का सम्मान खत्म हो जाए.





