Opinion

हुनर को मिला सहारा, मसाला और तेल कारोबार ने बदली सरिता की जिंदगी

14 लाख रुपए का ऋण और 35 प्रतिशत अनुदान से लगाईं आधुनिक मशीनें, अब हर महीने 70-80 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा

भोपाल, 18 सितंबर। फंदा विकासखंड की श्रीमती सरिता कुशवाह ने अपने हुनर और सरकारी सहायता के जरिए छोटे कारोबार को सफल उद्यम में बदल दिया है। पहले सीमित संसाधनों के कारण मसाले और कच्ची घानी तेल का काम छोटे स्तर पर कर रहीं सरिता अब आधुनिक मशीनों के साथ अपनी प्रसंस्करण इकाई चला रही हैं। व्यवसाय का विस्तार होने के बाद उन्हें हर महीने करीब 70 से 80 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। साथ ही उन्होंने तीन युवाओं को रोजगार भी दिया है।

पूंजी की कमी से सीमित था कारोबार

सरिता को मसाले और कच्ची घानी तेल तैयार करने का अनुभव पहले से था, लेकिन कारोबार बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनें खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी। इसके चलते उत्पादन सीमित था और आमदनी भी 8 से 10 हजार रुपए प्रतिमाह तक ही हो पाती थी।

पीएमएफएमई योजना से मिला आर्थिक सहयोग

सरिता को उद्यानिकी विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की जानकारी मिली। विभागीय मार्गदर्शन में उन्होंने व्यवसाय विस्तार के लिए आवेदन किया। वर्ष 2025-26 में यूको बैंक, भोपाल ने उन्हें 14 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया। योजना के तहत उन्हें ऋण राशि पर 35 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी मिला।

ऋण से उन्होंने कोल्ड प्रेस ऑयल मशीन, ऑयल फिल्टर मशीन, मसाला पल्वराइजर और ऑटोमेटिक पैकेजिंग मशीन लगाईं। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी और उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता तथा पैकेजिंग में सुधार हुआ।

‘मनोज मसाला एवं ऑयल’ नाम से बनाई पहचान

सरिता ने अपने उत्पादों को ‘मनोज मसाला एवं ऑयल’ नाम से बाजार में उतारा। आकर्षक पैकेजिंग और गुणवत्ता के चलते उत्पादों को स्थानीय बाजार में पहचान मिलने लगी। कारोबार बढ़ने के साथ उनकी आमदनी में भी लगातार सुधार हुआ।

सभी व्यावसायिक खर्च और बैंक ऋण की किश्तों का भुगतान करने के बाद अब सरिता करीब 70 से 80 हजार रुपए प्रतिमाह का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं। कारोबार के विस्तार से तीन युवाओं को रोजगार भी मिला है।

सरिता अपनी सफलता का श्रेय पीएमएफएमई योजना के साथ जिला प्रशासन और उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से मिले मार्गदर्शन को देती हैं। उनका कहना है कि वित्तीय सहायता और सही मार्गदर्शन मिलने से उन्हें अपने हुनर को बड़े व्यवसाय में बदलने का अवसर मिला।

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