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जाति प्रमाणपत्र शिकायत मामले में रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समेत अन्य पर केस

सतर्कता शाखा ने दर्ज किया प्रकरण, 1984 में जारी एसटी प्रमाणपत्र को जांच समिति ने बताया था अमान्य

भोपाल, 18 सितंबर। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग का अभ्यर्थी बनकर आरक्षण का लाभ लेने और जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी शिकायत के मामले में पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने कार्रवाई की है। शाखा ने सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की है। यह कार्रवाई गुना जिले के राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत के आधार पर की गई है।

1984 के एसटी प्रमाणपत्र की हुई थी जांच

मामले से जुड़े जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाणपत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने की थी। समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद विदिशा के क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण द्वारा वर्ष 1984 में जारी एसटी प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया था। जांच में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल सामने आए थे।

शिक्षक की नौकरी में ओबीसी, बाद में एसटी प्रमाणपत्र

सतर्कता शाखा की विवेचना में सामने आए तथ्यों के अनुसार पुलिस सेवा में आने से पहले संबंधित अधिकारी ने शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान खुद को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अभ्यर्थी बताया था। बाद में एमपीपीएससी परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति हुई और आगे पदोन्नति सहित अन्य सेवा लाभ मिले। पुलिस अब इन सभी पहलुओं और जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार उच्च स्तरीय छानबीन समिति की रिपोर्ट में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े तत्कालीन दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। यह जांच की जा रही है कि प्रमाणपत्र जारी करते समय निर्धारित नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्रवाई हुई थी या नहीं।

18 सितंबर को दर्ज हुआ प्रकरण

पुलिस के अनुसार 18 सितंबर 2026 को थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 167 और 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में दस्तावेजों, संबंधित लोगों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

डेटा वेरिफिकेशन: उपलब्ध पुलिस संबंधी जानकारी और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर नाम, तारीख, जांच समिति और दर्ज धाराओं का मिलान किया गया है। आरोपों को आरोप/जांच के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।

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