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मुकुटबन-गढ़चंदूर नई रेल लाइन को 493 करोड़ की मंजूरी

38.21 किमी नई लाइन से छोटा होगा रेल मार्ग, खनन और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा फायदा

भोपाल। भारतीय रेलवे ने महाराष्ट्र में रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। दक्षिण मध्य रेलवे के तहत मुकुटबन (आदिलाबाद) और गढ़चंदूर के बीच 38.21 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण पर 493 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा मध्य रेलवे के चौक-कर्जत खंड के 10.86 किलोमीटर हिस्से के दोहरीकरण को 497 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी गई है।

मुकुटबन-गढ़चंदूर से छोटा होगा रेल मार्ग

यवतमाल जिले का मुकुटबन और चंद्रपुर जिले का गढ़चंदूर प्रमुख औद्योगिक और खनन क्षेत्र हैं। यहां सीमेंट संयंत्रों के साथ वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदानें और चूना पत्थर की खदानें हैं। नई रेल लाइन से इन क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

रेलवे के अनुसार नई लाइन से परिवहन दूरी, समय और लागत में कमी आएगी। साथ ही वर्धा-मानिकगढ़ रेल खंड पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे मालगाड़ियों की आवाजाही को भी सुविधा मिलेगी।

परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, लाइन शुरू होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो-दो मेमू ट्रेनों के साथ सालाना करीब 6.08 मीट्रिक टन माल ढुलाई संभालने का अनुमान है। इसमें कोयला और कोक, सीमेंट, स्पंज आयरन, धातु स्क्रैप, लोहा-इस्पात, उर्वरक और खाद्यान्न जैसी वस्तुएं शामिल होंगी।

माजरी-नांदेड़ मार्ग से सीधा जुड़ाव

नई रेल लाइन से कोयला और सीमेंट क्षेत्रों को माजरी-नांदेड़ रेल मार्ग से सीधा संपर्क मिलेगा। इससे जालना, परभणी, छत्रपति संभाजीनगर और महाराष्ट्र-कर्नाटक के अन्य क्षेत्रों तक माल पहुंचाने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है। परियोजना से बल्हारशाह-नागपुर के व्यस्त रेल मार्ग पर निर्भरता भी घट सकती है।

चौक-कर्जत रेल खंड होगा डबल

दूसरी ओर, मध्य रेलवे के पनवेल-चौक-कर्जत मार्ग पर चौक-कर्जत के 10.86 किलोमीटर हिस्से के दोहरीकरण को 497 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। अभी यह खंड सिंगल लाइन है। दोहरीकरण से इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

यह मार्ग यात्री और माल परिवहन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। रेलवे के अनुसार दोहरीकरण से ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी और क्षेत्र में बढ़ती यात्री तथा माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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