13 दिन, 13 महीने और अब 13वां साल—बीजेपी के लिए कितना खतरनाक?

आलेख: विजय शर्मा
13 का अंक बीजेपी की राजनीति में संयोग से जुड़ी कई घटनाओं की याद दिलाता है। अब नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल का 13वां साल शुरू हो चुका है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिलसिला भी कोई राजनीतिक बदलाव लेकर आएगा?
राजनीति में अंक ज्योतिष का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन राजनीतिक घटनाओं के संयोग अक्सर चर्चा का विषय जरूर बन जाते हैं। बीजेपी के संदर्भ में 13 का अंक भी ऐसा ही एक संयोग बनकर सामने आता है। कभी 13 दिन की सरकार, कभी 13 महीने का कार्यकाल और अब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार का 13वां साल।
सबसे पहले बात पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की। वर्ष 1996 में उनकी पहली सरकार 16 मई से 1 जून तक चली। बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 1998 में उन्होंने फिर प्रधानमंत्री पद संभाला। यह सरकार करीब 13 महीने चली और अप्रैल 1999 में लोकसभा में विश्वास मत हारने के बाद गिर गई। बाद में 1999 में वे फिर प्रधानमंत्री बने और 2004 तक सरकार चली।
इसके बाद राज्यों की राजनीति में भी लंबे कार्यकाल और सत्ता परिवर्तन के उदाहरण सामने आते हैं। नरेंद्र मोदी अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार वे गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं।
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान भी करीब 13 साल मुख्यमंत्री रहे। वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने। इसके बाद मार्च 2020 में सत्ता परिवर्तन हुआ और शिवराज सिंह चौहान दोबारा मुख्यमंत्री बने। यह उदाहरण बताता है कि लंबे राजनीतिक कार्यकाल के बीच सत्ता परिवर्तन की स्थितियां बन सकती हैं।
छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह का कार्यकाल भी लंबे समय तक चला। वे लगातार तीन कार्यकाल मुख्यमंत्री रहे और 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनी।
अब केंद्र की राजनीति पर नजर डालें। नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में प्रधानमंत्री पद संभाला था। 2014 और 2019 में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और 2024 में तीसरी बार केंद्र में सरकार बनी। सितंबर 2026 में मोदी सरकार के कार्यकाल का 13वां साल चल रहा है।
इसी बीच विपक्ष की ओर से सरकार की नीतियों और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सामान्य वर्ग, आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट, यूजीसी और अन्य मुद्दों पर अलग-अलग संगठनों की ओर से विरोध और आंदोलन भी सामने आते रहे हैं। राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के स्थानीय चुनावों के नतीजों को भी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से सरकार के पक्ष या विपक्ष में जनमत के संकेत के रूप में देखते हैं। हालांकि स्थानीय चुनावों के परिणामों से केंद्र सरकार के भविष्य का सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इसलिए 13 का अंक बीजेपी के लिए शुभ है या अशुभ, यह राजनीतिक तथ्य नहीं बल्कि एक राजनीतिक संयोग और चर्चा का विषय है। असली फैसला जनता के मत और चुनावी नतीजे ही करेंगे। अब देखना यह होगा कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के इस दौर में राजनीतिक चुनौतियों और सामाजिक असंतोष का सामना किस तरह करती है और 13 के इस संयोग को राजनीतिक इतिहास किस रूप में दर्ज करता है





