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Mumbai BMC Heritage: 130 साल पुरानी इमारत में आज भी होती है शहर की सरकार, जानिए BMC भवन का रोचक इतिहास

मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की पहचान सिर्फ गगनचुंबी इमारतों और समुद्र से नहीं है। शहर के बीचोंबीच स्थित मुंबई महानगरपालिका (BMC) भवन अपने भीतर 130 साल से ज्यादा पुराना इतिहास समेटे हुए है। ब्रिटिश दौर में बनी यह इमारत आज भी मुंबई की स्थानीय सरकार का केंद्र है। यहां होने वाली बैठकों में शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं।

हेरिटेज इंजीनियर संजय आधावे के अनुसार, मौजूदा भवन का निर्माण 19वीं सदी के अंतिम दौर में हुआ। आर्किटेक्ट एफ. डब्ल्यू. स्टीवन ने इसका डिजाइन तैयार किया था। निर्माण कार्य 1889 में शुरू हुआ और 31 जुलाई 1893 को भवन पूरा हुआ।

1893 में तैयार हुई मौजूदा इमारत

मुंबई महानगरपालिका की स्थापना के बाद शहर में प्रशासनिक गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। नोट्स के अनुसार, पहले के सभागृह में बैठकें होती थीं और बाद में वर्तमान भवन को तैयार किया गया। मौजूदा परिषद भवन को उस समय की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया था।

इमारत की खासियत इसकी ऊंचाई और वास्तुकला है। भवन के सबसे ऊपरी हिस्से में बने डोम के अंदर पानी का टैंक भी था। उस दौर में जब बिजली की सुविधा नहीं थी, तब पानी को ऊंचाई तक पहुंचाने की व्यवस्था अलग तरीके से की जाती थी।

सोने के पत्तर से सजा गुंबद

BMC भवन की वास्तुकला में कई बारीकियां आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। इसके ऊपरी हिस्से में सोने के पत्तर लगाए गए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 36 तोला सोने के पत्तर लगाए गए थे।

शनिवार और रविवार को यहां हेरिटेज स्टडी के लिए लोग पहुंचते हैं। भवन की वास्तुकला, निर्माण तकनीक और ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए विशेषज्ञों और इतिहास में रुचि रखने वालों की दिलचस्पी बनी रहती है।

परिषद हाल में 64 से बढ़कर 237 नगरसेवक

जिस परिषद हाल को कभी करीब 64 सदस्यों के लिए बनाया गया था, वहां बाद के दौर में मुंबई के नगरसेवकों की संख्या बढ़ने के साथ बैठने की व्यवस्था भी बदली। वर्तमान व्यवस्था में कुल 237 नगरसेवकों के बैठने की क्षमता बताई जाती है।

नगरपालिका की बैठकों और जनप्रतिनिधियों की गतिविधियों का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। नगरसेवकों के आने-जाने के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। परिषद की बैठकें अब लाइव भी देखी जा सकती हैं।

मेयर ही होता है परिषद का सभापति

मुंबई की महानगरपालिका व्यवस्था की अपनी अलग राजनीतिक परंपरा है। यहां मेयर परिषद की बैठक की अध्यक्षता करता है। मुंबई नगरपालिका से जुड़े कानूनी ढांचे का इतिहास 19वीं सदी तक जाता है। 1888 के बॉम्बे म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट ने महानगरपालिका की व्यवस्था को नया स्वरूप दिया। इस दौर में फिरोजशाह मेहता की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

मुंबई की नगरपालिका व्यवस्था को देश की सबसे पुरानी और प्रभावशाली शहरी स्थानीय शासन व्यवस्थाओं में गिना जाता है। इसके प्रशासनिक मॉडल का प्रभाव दूसरे शहरों पर भी पड़ा।

किपलिंग परिवार से भी जुड़ा इतिहास

BMC भवन के इतिहास में कला और वास्तुकला से जुड़े लॉकवुड किपलिंग का भी उल्लेख मिलता है। वे 19वीं सदी में भारत आए और मुंबई के कला एवं डिजाइन संस्थानों से जुड़े रहे। वे जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों में थे और बाद में इसके डीन रहे।

लॉकवुड किपलिंग प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग के पिता थे। मुंबई में उनके समय की कला और वास्तुकला की विरासत आज भी शहर के औपनिवेशिक इतिहास का हिस्सा है।

अंग्रेजी दौर की तस्वीरें हटाई गईं

समय के साथ BMC भवन में कई बदलाव हुए। ब्रिटिश काल से जुड़ी कुछ तस्वीरें और सामग्री हटाई गईं। इसके बावजूद भवन की मूल वास्तुकला और ऐतिहासिक स्वरूप आज भी मुंबई के अतीत की कहानी बताते हैं।

हेरिटेज विशेषज्ञों के अनुसार, यह भवन केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि मुंबई के प्रशासनिक और वास्तु इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

जहां कभी 64 लोग बैठते थे, वहां आज की राजनीति

मुंबई की आबादी और महानगरपालिका के विस्तार के साथ परिषद की भूमिका भी बढ़ती गई। कभी सीमित प्रतिनिधियों के लिए तैयार किया गया परिषद हाल आज बड़े राजनीतिक निर्णयों का केंद्र है। यहां जनप्रतिनिधि शहर की सड़क, पानी, सफाई, स्वास्थ्य, परिवहन और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

यानी 1893 में तैयार हुई यह ऐतिहासिक इमारत आज भी मुंबई की बदलती जरूरतों के साथ कदमताल कर रही है। इसकी दीवारें ब्रिटिश दौर की कहानी कहती हैं, जबकि परिषद हाल में होने वाली बैठकें आधुनिक मुंबई के भविष्य की दिशा तय करती हैं।

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