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सहकारिता से बदली किसानों की तस्वीर, मध्यप्रदेश में डेयरी क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने की क्षमता: डॉ. संजय गोवाणी

एमपीसीडीएफ में सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने पर सहकारिता सप्ताह का शुभारंभ, डेयरी विकास और किसान सशक्तिकरण पर मंथन

भोपाल, 29 जून 2026।
सहकारिता आंदोलन ने किसानों को उनकी मेहनत का पारदर्शी और उचित मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मध्यप्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं और बेहतर नस्ल सुधार, आधुनिक तकनीक तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है। यह बात मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एमपीसीडीएफ) के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी ने सहकारिता सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर कही।

भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एमपीसीडीएफ मुख्यालय भोपाल में सहकारिता सप्ताह का आयोजन शुरू हुआ। यह आयोजन प्रदेश के छह दुग्ध संघों में एक साथ किया जा रहा है। कार्यक्रम में ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से लगभग 250 दुग्ध संघों के अधिकारी-कर्मचारी तथा सहकारी समितियों से जुड़े दुग्ध उत्पादक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सहकारिता शपथ के साथ हुई।

सहकारिता ने किसानों को दिया उचित मूल्य का भरोसा

सेमिनार में “डेयरी क्षेत्र में सहकारिता का योगदान” विषय पर संबोधित करते हुए डॉ. संजय गोवाणी ने सहकारिता आंदोलन के प्रमुख स्तंभों सरदार वल्लभभाई पटेल, त्रिभुवनदास पटेल और वर्गीज़ कुरियन को नमन किया।

उन्होंने कहा कि सहकारी संस्था “लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिए संचालित व्यवस्था” है। आजादी के बाद सहकारिता आंदोलन ने तेजी पकड़ी और वर्ष 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की स्थापना तथा वर्ष 1970 में ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत ने देश में दुग्ध क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया।

डॉ. गोवाणी ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था से पहले दूध उत्पादक किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। सहकारी डेयरी मॉडल ने “जैसा दूध वैसा पैसा” की अवधारणा को लागू करते हुए गुणवत्ता के आधार पर किसानों को पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया। इसके साथ ही पशु स्वास्थ्य सेवाएं, उपचार सुविधाएं और किसान परिवारों के कल्याण पर भी ध्यान दिया गया।

10 हजार गांवों तक पहुंची डेयरी सहकारिता, विस्तार की बड़ी संभावना

एमपीसीडीएफ प्रबंध संचालक ने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 10 हजार गांवों में पंजीकृत सहकारी समितियां संचालित हैं, जबकि प्रदेश में 52 हजार से अधिक गांव हैं। ऐसे में डेयरी सहकारिता के विस्तार की अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वर्तमान में देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में पशुधन की संख्या भी काफी अधिक है। नस्ल सुधार कार्यक्रम, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर प्रदेश डेयरी उत्पादन में शीर्ष स्थान हासिल कर सकता है।

उन्होंने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारी डेयरी संस्थाओं में कार्य करना केवल रोजगार नहीं बल्कि किसानों की सेवा करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं को मजबूत रखना जरूरी है, क्योंकि इनके कमजोर होने पर किसानों को निजी व्यापारियों पर निर्भर होना पड़ सकता है।

सहकारिता के सात सिद्धांतों पर हुआ विस्तार से संवाद

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के महाप्रबंधक जयदेव विश्वास ने “सहकारिता के सिद्धांत” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक सहकारिता आंदोलन की मजबूत नींव इंग्लैंड के रोचडेल पायनियर्स ने रखी थी और भारत में बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में सहकारी समितियों की शुरुआत हुई।

उन्होंने सहकारिता के सात प्रमुख सिद्धांतों को सफलता की आधारशिला बताया—

स्वैच्छिक एवं खुली सदस्यता

लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण

सदस्यों की आर्थिक भागीदारी

स्वायत्तता एवं स्वतंत्रता

शिक्षा, प्रशिक्षण और सूचना

सहकारी संस्थाओं के बीच सहयोग

समुदाय के प्रति जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारिता का त्रिस्तरीय ढांचा—ग्राम स्तर पर दुग्ध समिति, जिला स्तर पर दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर महासंघ—इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित है।

डेयरी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की संभावना

जबलपुर सहकारी दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राहुल त्रिपाठी ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में डेयरी सहकारिता के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। सामूहिक प्रयास, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से प्रदेश डेयरी क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है।

सेमिनार में एमपीसीडीएफ भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहकारिता के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। इनमें ग्रुप हेड एम एंड पी असीम निगम, प्लांट ऑपरेशन ग्रुप हेड डी.के. पांडे, समन्वय ग्रुप हेड शुभांकर नंदा शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र संचालन ग्रुप हेड मिलन मिश्रा ने किया, जबकि प्रशासन ग्रुप हेड अजय शाह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया।

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