भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय का फैसला, आरोपियों को 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास
भोपाल, 29 जून । पद का दुरुपयोग कर षड्यंत्रपूर्वक भ्रष्टाचार करने और किसान की भूमि की नियम विरुद्ध नीलामी करने के मामले में विशेष न्यायालय ने जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के अधिकारियों सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), भोपाल के न्यायाधीश श्री मनोज कुमार सिंह ने विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, प्रबंधक सहकारिता निरीक्षक विनोद कुमार देवल, सहकारिता निरीक्षक ए.पी.एस. कुशवाह और क्रेता परमजीत बैदी को दोषी पाया।
न्यायालय ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता धारा 420 के साथ धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) में 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक आरोपी पर ₹1000-₹1000 अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं आरोपी अधिकारियों हरिहर प्रसाद मिश्रा, विनोद कुमार देवल और ए.पी.एस. कुशवाह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत भी दोषी मानते हुए प्रत्येक धारा में 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹1000-₹1000 अर्थदंड से दंडित किया गया।
इस मामले में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती हेमलता कुशवाह ने पैरवी की।
किसान की 5 एकड़ जमीन को कम कीमत पर नीलाम करने का आरोप
अभियोजन के अनुसार, ग्राम पड़रिया जार, तहसील हुजूर, जिला भोपाल निवासी किसान हरि सिंह ने कृषि कार्य के लिए अपनी भूमि बंधक रखकर ₹18 हजार रुपये का ऋण पंप और थ्रेशर खरीदने के लिए लिया था।
आरोप था कि आरोपी अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन करते हुए किसान की करीब 5 एकड़ कृषि भूमि को 16 फरवरी 2002 को मात्र ₹40 हजार रुपये में परमजीत बैदी के पक्ष में नीलाम कर दिया।
अभियोजन के मुताबिक, भूमि का मूल्य बाजार मूल्य और कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य से काफी कम था। आरोपियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए नीलामी से संबंधित दस्तावेजों और नोटशीट में हेरफेर कर उन्हें पुष्टि के लिए संयुक्त पंजीयक, सहकारी संस्थाएं भोपाल के समक्ष प्रस्तुत किया।
षड्यंत्रपूर्वक कराई गई नीलामी
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा योजना बनाकर कई भूमि नीलामी प्रक्रियाओं में एक ही व्यक्ति परमजीत बैदी को क्रेता बनाया जाता था। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस मध्य प्रदेश ने जांच कर प्रकरण दर्ज किया।
विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर फैसला
विशेष न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों, दस्तावेजों और लिखित तर्कों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषी पाया। न्यायालय ने माना कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से नीलामी प्रक्रिया को अंजाम दिया और किसान को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
फैसले को सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और पद के दुरुपयोग के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।