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Interior Designers के लिए बने अलग रेगुलेटरी अथॉरिटी और कानून, विशेषज्ञों ने उठाई मांग

Interior Designers के लिए बनेगा अलग कानून? रेगुलेटरी अथॉरिटी की मांग तेज

भोपाल। इंटीरियर डिजाइनिंग के तेजी से बढ़ते क्षेत्र को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए इंटीरियर डिजाइनर्स के लिए अलग रेगुलेटरी अथॉरिटी और रेगुलेशन एक्ट बनाए जाने की मांग उठी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटीरियर डिजाइनिंग अब केवल आर्किटेक्चर का हिस्सा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक स्वतंत्र और तेजी से विकसित होता प्रोफेशन बन चुका है।

इंटीरियर डिजाइनिंग अब स्वतंत्र विषय

जानकारों के अनुसार पहले इंटीरियर डिजाइनिंग को आर्किटेक्चर का हिस्सा माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह एक स्वतंत्र विषय के रूप में विकसित हुआ है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें कलात्मकता के साथ तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का भी इस्तेमाल होता है।

देश के कई विश्वविद्यालयों में बैचलर इन इंटीरियर डिजाइनिंग, मास्टर्स और पीएचडी स्तर के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षित इंटीरियर डिजाइनर्स आवासीय, व्यावसायिक, सरकारी और धार्मिक परियोजनाओं में काम कर रहे हैं।

बढ़ा इंटीरियर डिजाइनिंग का आर्थिक महत्व

बदलती जीवनशैली और आधुनिक निर्माण के साथ भवनों के इंटीरियर पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है। रिहायशी और व्यावसायिक भवनों के अलावा सरकारी एवं धार्मिक निर्माण परियोजनाओं में भी इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा रखा जाने लगा है।

ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम और नियामक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

अलग कानून और नियामक संस्था नहीं

मांग उठाने वालों का कहना है कि वर्तमान में इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए अलग से कोई ऐसा कानून या विधिक नियामक संस्था नहीं है, जो इस पेशे को नियंत्रित कर सके। उन्होंने बार काउंसिल, मेडिकल काउंसिल, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स जैसे पेशेवर संस्थानों का उदाहरण देते हुए इंटीरियर डिजाइनर्स के लिए भी वैधानिक व्यवस्था की मांग की है।

उनका कहना है कि इंटीरियर डिजाइनिंग में अलग-अलग विशेषज्ञता और स्वतंत्र शैक्षणिक पाठ्यक्रम विकसित होने के कारण अब इस क्षेत्र के लिए अलग पहचान और नियामक ढांचे की आवश्यकता है।

अप्रशिक्षित लोगों से ग्राहकों को नुकसान का दावा

रेगुलेटरी व्यवस्था नहीं होने के कारण इस क्षेत्र में बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के लोग भी काम कर रहे हैं। मांग उठाने वालों का आरोप है कि ऐसे लोगों के कारण कई बार ग्राहकों को आर्थिक नुकसान और विवादों का सामना करना पड़ता है।

उनका कहना है कि स्पष्ट कानून और नियामक संस्था होने से इंटीरियर डिजाइनर्स के लिए पंजीयन, योग्यता, आचार संहिता और शिकायत निवारण की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इससे ग्राहकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षित इंटीरियर डिजाइनर्स को भी पेशेवर पहचान और सुरक्षा मिल सकेगी।

तेजी से बढ़ते क्षेत्र के लिए नियमन की जरूरत

इंटीरियर डिजाइनिंग के तेजी से विस्तार को देखते हुए इस क्षेत्र के लिए अलग कानून और नियामक संस्था की मांग को अब समय की जरूरत बताया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए योग्य पेशेवरों की पहचान, काम के मानक तय करने और ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

इंटीरियर डिजाइनिंग को स्वतंत्र प्रोफेशन बताते हुए इंटीरियर डिजाइनर्स के लिए अलग रेगुलेटरी अथॉरिटी और रेगुलेशन एक्ट बनाने की मांग उठी है।

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