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भोपाल में मिट्टी खनन का खेल: समतलीकरण की आड़ में 6 हेक्टेयर जमीन को खोदा, 22 लाख की रॉयल्टी भी बकाया

रोजीवे गांव में अवैध उत्खनन पर कार्रवाई, परमिशन, रॉयल्टी और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

भोपाल। हुजूर तहसील क्षेत्र के ग्राम रोजीवे में समतलीकरण की अनुमति की आड़ में कथित रूप से बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन का मामला सामने आया है। खनिज विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई की गई। जिस भूमि पर यह गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है, वह ग्राम निवासी हरिचरण की निजी भूमि बताई जा रही है। भूमि का क्षेत्रफल करीब 6 हेक्टेयर है।

जानकारी के अनुसार, भूमि को समतल करने के लिए खनिज विभाग से अनुमति ली गई थी। इस अनुमति में करीब 44 हजार घनमीटर मिट्टी हटाने की अनुमति का उल्लेख बताया जा रहा है। आरोप है कि इसी अनुमति का उपयोग मिट्टी बेचने के लिए किया गया और समतलीकरण के बजाय भूमि में बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए।

समतलीकरण की अनुमति या मिट्टी बेचने का जरिया?

स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से क्षेत्र में पोकलेन मशीनों और डंपरों के माध्यम से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा था। भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

शिकायत के बाद हुजूर एसडीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मंगलवार को खनिज विभाग और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।

हालांकि कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि पोकलेन और डंपर को जब्त करने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें जब्ती के बजाय भूमि स्वामी के कर्मचारी की सुपुर्दगी में दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

22 लाख रुपये की रॉयल्टी बकाया, फिर रसीद कैसे जारी हुई?

मामले में सबसे बड़ा सवाल रॉयल्टी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 44 हजार घनमीटर मिट्टी की रॉयल्टी के रूप में करीब 22 लाख रुपये की राशि बकाया है, जिसकी वसूली की कार्रवाई की जा रही है।

लेकिन सवाल यह है कि यदि रॉयल्टी की रसीद राशि जमा करने के बाद ही जारी होती है, तो बिना भुगतान के इतनी बड़ी राशि की रॉयल्टी रसीद कैसे जारी हुई?

यह स्थिति विभागीय प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। मामले में खनिज निरीक्षक की ओर से बताया गया कि बकाया राशि की वसूली सहित आगे की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।

कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बरकरार

इस मामले में कई बिंदु जांच के दायरे में हैं—

यदि उद्देश्य केवल भूमि का समतलीकरण था तो अतिरिक्त मिट्टी हटाने की अनुमति की आवश्यकता क्यों पड़ी?

समतलीकरण में खेत की ऊंचाई-नीचाई बराबर की जाती है, फिर इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी बाहर कैसे गई?

अनुमति मिलने के बाद कई महीनों तक पोकलेन और डंपर चलते रहे, लेकिन नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?

6 हेक्टेयर भूमि में करीब 30 फीट तक खुदाई होने तक खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां थी?

बिना रॉयल्टी जमा किए 22 लाख रुपये की बकाया राशि कैसे दर्ज हुई?

सीमांकन और गहराई जांच के बाद होगा वास्तविक आकलन

प्रशासन अब भूमि का सीमांकन और खुदाई की गहराई की जांच कराने की तैयारी में है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनुमति से अधिक कितना उत्खनन हुआ और संभावित आर्थिक नुकसान कितना है।

इस मामले में जिला खनिज अधिकारी एमएस रावत से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल पर संपर्क करने पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। मामले में विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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