ट्विशा शर्मा सुसाइड मामला: सुबह FIR, शाम को सास को मिली जमानत, फरार पति की याचिका पर सोमवार को सुनवाई

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में SIT गठित, पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
भोपाल, 15 मई। राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा सुसाइड मामले में शुक्रवार को पूरे दिन घटनाक्रम तेजी से बदलता रहा। कटारा हिल्स थाना पुलिस ने मृतका ट्विशा शर्मा की सास एवं पूर्व जिला जज गिरीबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। सुबह मामला दर्ज होने के बाद शाम तक पूर्व जज गिरीबाला सिंह को अदालत से जमानत मिल गई, जबकि आरोपी पति समर्थ सिंह फिलहाल फरार बताया जा रहा है। उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।
जानकारी के अनुसार, इस मामले की सुनवाई दसवें अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में हुई। कटारा थाना प्रभारी सुनील दुबे ने बताया कि पुलिस आरोपी पति की तलाश में जुटी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर द्वारा विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस SIT का नेतृत्व एसीपी रजनीश कश्यप करेंगे। टीम में सब इंस्पेक्टर सुनील दुबे, वासुदेव सविता, संजय दुबे सहित अन्य पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है।
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार अब तक नहीं
मृतका ट्विशा शर्मा के परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को पोस्टमार्टम होने के बावजूद शव अभी तक मर्चुरी में रखा हुआ है। परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
दहेज प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप
नोएडा निवासी 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने 12 मई की रात कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के भाई मेजर हर्षित शर्मा और अन्य परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शादी के महज एक साल के भीतर ट्विशा को दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि ट्विशा के शरीर पर चोट और नीले निशान पाए गए हैं, जिससे मामला आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने पति समर्थ सिंह पर सबूत मिटाने का आरोप भी लगाया है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। मृतका के परिजनों का आरोप है कि आरोपियों के प्रभावशाली होने के कारण पुलिस शुरुआत में कार्रवाई करने से बचती रही। एफआईआर दर्ज कराने के लिए परिवार को रातभर थाने के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा।
हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बयानों और अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही कानूनी प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज की गई। अब SIT जांच के बाद मामले में कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




