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एमसीयू में नाटक ‘अनोखा वरदान’ का शानदार मंचन, दर्शकों ने सराहा विद्यार्थियों का अभिनय

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में सशक्त अभिनय और चुटीले संवादों से गूंजा मुक्ताकाश मंच

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा अध्ययन एवं विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘अनोखा वरदान’ ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। विश्वविद्यालय परिसर के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित इस नाट्य प्रस्तुति को विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने खूब सराहा। निर्वाण नाट्य समूह द्वारा मंचित इस नाटक में सामाजिक संदेश, हास्य और लोककथा का प्रभावशाली समन्वय देखने को मिला।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रेमशंकर शुक्ला ने विद्यार्थियों के अभिनय, संगीत, प्रकाश व्यवस्था और मंच संयोजन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता से नाटक को जीवंत बना दिया। उन्होंने सभी कलाकारों और आयोजन टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि इस प्रकार के रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों के जीवन की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सत्र के समापन अवसर पर इससे बेहतर सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं हो सकती थी। कुलगुरु ने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का हिस्सा है नाट्य अभ्यास

विभाग प्रमुख डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रकार की प्रस्तुतियां विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यहां विद्यार्थी केवल फिल्म अध्ययन ही नहीं बल्कि अभिनय, रंगमंच, संगीत और अन्य कलात्मक माध्यमों का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

सामाजिक संदेश से भरपूर रही नाटक की कहानी

‘अनोखा वरदान’ नाटक में समाज में व्याप्त गरीबी और अमीरी के अंतर को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाटक की कहानी एक लालची सेठ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मंदिर में भगवान श्री गणेश की भविष्यवाणी सुन लेता है कि एक गरीब भिखारिन एक सप्ताह में अमीर बनने वाली है।

इसके बाद भगवान श्री गणेश उस लालची सेठ का कान मंदिर से चिपका देते हैं और कहते हैं कि जब तक वह भिखारिन को एक लाख रुपये नहीं देगा, उसका कान नहीं छूटेगा। नाटक में सेठ का संवाद “कान कटवा लूंगा, लेकिन पैसा नहीं दूंगा” दर्शकों को खूब हंसाता है। अंत में सेठानी भिखारिन को पैसे देती है और कहानी सुखद मोड़ पर समाप्त होती है।

कलाकारों ने बांधा समां

नाटक के लेखक रेनू जैन और निर्देशक ध्रुव आचार्य रहे। सह-निर्देशन प्रमेय दुबे ने किया, जबकि नृत्य परिकल्पना सृष्टि गांगुली द्वारा की गई।

मुख्य कलाकारों में अथर्व सोनी ने शिव, गुनगुन पांचाल ने गणेश, लावण्या श्रीवास्तव ने पार्वती, प्रमेय दुबे ने सेठ, स्वास्तिक उपाध्याय ने मुनीम, शिवि सिंह ने सेठानी, वैष्णवी कुमारी ने भिखारिन और आयुषी बोरकर ने भिखारिन की बेटी की भूमिका निभाई।

संगीत संयोजन में हारमोनियम पर भावेश शर्मा, ढोलक पर उदय अस्थाना तथा गायन में वृंदा, अश्लेषा सिसोदिया और आयुष श्रीवास्तव ने प्रस्तुति दी। मंच के पीछे तकनीकी और सहयोगी टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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