
कांग्रेस ने मध्यप्रदेश सरकार पर लगाए गेहूं खरीदी में अव्यवस्था और किसानों के साथ वादाखिलाफी के आरोप
भोपाल। कुणाल चौधरी ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर किसानों के साथ छल, झूठे प्रचार और अव्यवस्थित गेहूं खरीदी का आरोप लगाया है। भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के नाम पर “कृषि उत्सव” मना रही है, जबकि जमीनी हकीकत में किसान आर्थिक संकट, खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था और सरकारी लापरवाही से जूझ रहा है।
इस अवसर पर मुकेश नायक, कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज, रितेश त्रिपाठी और सुभाष भी उपस्थित रहे।
“उत्पादन ज्यादा, खरीदी लक्ष्य कम”
कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार अपने विज्ञापनों में दावा कर रही है कि प्रदेश में इस वर्ष 365.11 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन हुआ है। यदि उत्पादन इतना अधिक हुआ है, तो सरकार ने केवल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य क्यों रखा? उन्होंने सवाल उठाया कि बाकी किसानों की उपज आखिर कहां जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति और नियत दोनों किसान विरोधी हैं। प्रदेशभर के खरीदी केंद्रों और सोसायटियों में किसान कई दिनों तक लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। कहीं कट्टियों की कमी बताई जा रही है तो कहीं वेयरहाउस भरे होने का बहाना बनाया जा रहा है।
“खरीदी में देरी से किसान परेशान”
कांग्रेस नेता ने कहा कि गेहूं की फसल फरवरी से मंडियों में आना शुरू हो गई थी और केंद्र सरकार द्वारा पहले ही लगभग 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी का कोटा दिया जा चुका था। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने खरीदी प्रक्रिया 9 अप्रैल से शुरू की। उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ महीने बाद भी सरकार लगभग 73 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीद सकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार लगभग 19.4 लाख किसानों ने पंजीयन कराया और करीब 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं का पंजीयन हुआ। इसके बावजूद खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी है और लाखों किसान अब भी अपनी उपज बेचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
“भंडारण और भुगतान व्यवस्था पूरी तरह विफल”
कुणाल चौधरी ने कहा कि खरीदी केंद्रों पर हालात बेहद खराब हैं। किसान 4 से 5 दिनों तक लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन उनकी फसल की तुलाई नहीं हो पाती। सरकार के पास पर्याप्त भंडारण व्यवस्था, कट्टियां और समय पर भुगतान की व्यवस्था तक नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को जानबूझकर परेशान कर निजी व्यापारियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है ताकि किसान मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेच दें।
भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप
कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार पर किसानों से वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में गेहूं ₹2700 प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया गया था, लेकिन किसानों को केवल ₹40 बोनस देकर गुमराह किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने 28 मार्च को सोसायटी भुगतान की अंतिम तिथि तय कर किसानों पर 14 से 18 प्रतिशत तक की पेनल्टी का बोझ डाल दिया, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हुई है।
कांग्रेस ने उठाई खरीदी अवधि बढ़ाने की मांग
कुणाल चौधरी ने मांग की कि प्रदेश सरकार तत्काल गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाए, सभी पंजीकृत किसानों की उपज खरीदे, पर्याप्त भंडारण और कट्टियों की व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा किसानों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो कांग्रेस पार्टी किसानों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से लड़ेगी।



