पेड़ों की टहनियों से बनेगा ईंधन, निगम को होगी कमाई

अन्ना नगर की जगह एम्स के पास लगेगा बायो-ब्रिकेट प्लांट, रोज 20 टन हरित कचरे का होगा इस्तेमाल
भोपाल। शहर में पेड़ों की छंटाई के बाद निकलने वाली टहनियां, झाड़ियां और अन्य हरित कचरा अब परेशानी के बजाय कमाई का जरिया बनेगा। नगर निगम ने हरित कचरे से बायो-ब्रिकेट बनाने के लिए प्रस्तावित प्लांट की जगह बदल दी है। पहले इसे अन्ना नगर स्थित कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर लगाया जाना था, लेकिन अब प्लांट एम्स के पास लगाया जा रहा है। करीब दो करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस प्लांट में प्रतिदिन 20 टन हरित कचरे का उपयोग किया जाएगा।
प्लांट स्थल पर कचरे को छोटे टुकड़ों में काटने वाली मशीन पहुंच चुकी है। सिविल निर्माण का काम जारी है और इसे करीब एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद अन्य मशीनें लगाई जाएंगी। निगम को उम्मीद है कि नवंबर के पहले सप्ताह से प्लांट शुरू हो जाएगा।
टहनियों से बनेगा बुरादा, फिर ब्रिकेट
प्लांट में टहनियों और झाड़ियों को मशीनों से काटकर बुरादा तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे दबाकर बायो-ब्रिकेट बनाए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकेगा। बिजली कंपनी, रहवासी समितियों और बड़े संस्थानों से निकलने वाला हरित कचरा भी यहां लाया जाएगा।
आग की घटना के बाद बदली जगह
अन्ना नगर में प्लांट लगाने के लिए 2025 में योजना बनाई गई थी, लेकिन कोई कंपनी आगे नहीं आई। इसी दौरान ट्रांसफर स्टेशन के पीछे बने रीयूज फैब्रिक प्लांट में आग लग गई। इसके बाद निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने वहां नए प्लांट की मंजूरी रोक दी। अब एम्स के पास नई जगह तय की गई है।
निगम को मिलेगी रॉयल्टी
प्लांट लगाने और संचालन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी इको हाइजीन की होगी। कंपनी करीब दो करोड़ रुपए निवेश करेगी। इसके बदले निगम को हर महीने करीब 50 हजार रुपए रॉयल्टी मिलने की उम्मीद है। इससे हरित कचरे की खुले में डंपिंग और जलाने पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।





